"Ek Pal Ka Pyaar" सुबह 9 बजे, मेट्रो स्टेशन पर भीड़ थी। आरोही भागते हुए आई और गलती से अजनय की बाहों में टकरा गई। किताबें बिखर गईं, निगाहें मिलीं। "माफ कीजिए," उसने कहा। "अगर हर माफी में ये मुस्कान मिले, तो रोज टकराना मंज़ूर है," अजनय ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया। मेट्रो आई, दोनों साथ चढ़े। सीट एक ही मिली। बातों का सिलसिला शुरू हुआ — उसे बारिश पसंद थी, उसे चाय। दोनों को गुलज़ार की शायरी पसंद थी। अगला स्टेशन आया, आरोही उतरने लगी। "कल फिर यहीं मिलोगी?" अजनय ने पूछा। वो मुस्कराई, "हर रोज़।" एक टक्कर से शुरू हुआ, एक वादा बन गया। एक पल का प्यार, जो उम्र भर साथ चला।