रेलवे स्टेशन का प्लेटफॉर्म लगभग खाली हो चुका था। रात के साढ़े बारह बज रहे थे। एक युवक अपने बैग पर बैठा था। उसकी जेब में वापसी का टिकट था, लेकिन उसके सपने कहीं पीछे छूट चुके थे। वह तीसरी बार नौकरी के इंटरव्यू में असफल होकर घर लौट रहा था। उसके फोन में परिवार के कई मिस्ड कॉल थे, लेकिन वह किसी से बात नहीं करना चाहता था। उसने आसमान की तरफ देखा और बहुत धीरे से कहा, "भगवान, आखिर मुझमें कमी क्या है?"