"सोचो, अगर तुम्हें आज रात ये मालूम हो जाए कि ये तुम्हारी ज़िन्दगी की आख़िरी रात है... तो तुम क्या करोगे? क्या मोबाइल स्क्रॉल करते रहोगे? या अल्लाह से माफ़ी मांगोगे? दोस्तों! आज मैं तुम्हें एक ऐसी हकीकत सुनाने वाला हूँ, जो दिल को हिला देगी…" --- 🌙 कहानी – “एक गुनाहगार का तौबा” कभी एक नौजवान था, जिसकी पूरी ज़िन्दगी गुनाहों में गुज़र रही थी। वह नमाज़ से दूर था, दोस्तों की महफ़िलों में वक़्त बर्बाद करता, और हर वो काम करता जो अल्लाह को नापसंद है। लोग उसे बुरा समझते, लेकिन उसके दिल में हमेशा एक सवाल उठता था: "क्या अल्लाह मुझे माफ़ करेगा? मैं तो बहुत गुनाहगार हूँ..." एक रात वह बहुत परेशान होकर मस्जिद के किनारे बैठ गया। आँखों से आँसू बह रहे थे। उसने आसमान की तरफ़ देखा और कहा: "ए अल्लाह! अगर तू मुझे माफ़ नहीं करेगा तो मेरा क्या होगा? मैंने तुझे भुला दिया, लेकिन तू तो रहमान और रहीम है।" इतना कहकर वह रोते-रोते सो गया। नींद में उसने एक अजीब सपना देखा… क़यामत का दिन है। लाखों लोग जमा हैं। सूरज सिर पर है। लोग पसीने में डूबे हुए हैं। सब अपने-अपने हिसाब की फिक्र में हैं। अचानक फ़रिश्ते उसकी तरफ़ आते हैं और कहते हैं: "चल, तेरा हिसाब होने वाला है।" उसका दिल कांपने लगता है। वह सोचता है: “मेरे नाम-ए-आमाल में तो गुनाह ही गुनाह हैं। अब क्या होगा?” लेकिन जब नाम-ए-आमाल उसके हाथ में आता है, तो वह हैरान रह जाता है! उसके गुनाह कम होने लगे… और नेकियाँ बढ़ने लगीं। वह रोते हुए कहता है: “या अल्लाह! ये सब कैसे?” आवाज़ आती है: "आज तेरे आँसू तेरे गुनाह धो गए। जिस रात तू तौबा करके मुझे पुकारा था, उसी रात मैंने तेरी किस्मत बदल दी।" वह सपना देखकर कांपता हुआ उठता है और उसी वक़्त तौबा कर लेता है। उस दिन के बाद वह नौजवान पूरी ज़िन्दगी नमाज़, रोज़ा, कुरआन और नेक कामों में गुज़ार देता है। --- 🌹 आखिर में पैग़ाम भाइयों और बहनों! यह कहानी हमें सिखाती है कि चाहे हमारे गुनाह कितने भी बड़े क्यों न हों… अल्लाह की रहमत उससे भी बड़ी है। 🕋 कुरआन में अल्लाह फ़रमाता है: > “ऐ मेरे बंदों, जो अपने ऊपर ज़ुल्म कर बैठे हो, अल्लाह की रहमत से मायूस मत होना। बेशक, अल्लाह सारे गुनाह माफ़ कर देता है।” (सूरह ज़ुमर: 53)
