आख़िरकार रूही को यह एहसास हो जाता है कि उसके साथ जो कुछ भी हो रहा है, वो महज़ इत्तेफाक नहीं बल्कि किसी की सोची-समझी चाल है। वह तय करती है कि अब और नहीं, उसे नहार को सारी सच्चाई बता देनी चाहिए। लेकिन ठीक उसी वक्त अग्नि को भी आभास हो जाता है कि अगर रूही ने मुंह खोल दिया, तो उसका खेल खत्म हो सकता है। इसलिए अग्नि एक खतरनाक कदम उठाती है—वह रूही के कमरे में एक ऐसी जड़ी-बूटी का धुआं छोड़ देती है जिससे रूही का मानसिक संतुलन और बिगड़ जाए। अग्नि चाहती है कि नहार को यकीन हो जाए कि अब रूही अपने बच्चे की देखभाल करने के लायक नहीं रही और वह खुद उसकी जगह ले सके। मगर अग्नि की यह चाल इतनी आसानी से कामयाब नहीं होने वाली, क्योंकि तभी मधुबाला को कुछ अजीब महसूस होता है। वह देखती है कि रूही के कमरे से धुआं निकल रहा है। वह बिना वक्त गंवाए दरवाजा खोलकर रूही को बाहर निकाल लेती है। यही वह पल होता है जब मधुबाला को शक हो जाता है कि रूही के साथ जो हो रहा है, उसके पीछे अग्नि और दादी का हाथ हो सकता है। अब मधुबाला इस सच्चाई की तह तक जाने का फैसला करती है। वह चुपचाप अग्नि और दादी पर नज़र रखने लगती है ताकि ठोस सबूत इकट्ठा कर सके। बहुत जल्द मधुबाला सारी सच्चाई नहार के सामने उजागर करने वाली है, और तब अग्नि और दादी के सारे राज खुलकर सामने आ जाएंगे।
