नमस्कार दोस्तों, मैं रविश कुमार। दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य ताकतें आज गहरी खामोशी में हैं। क्योंकि ईरान ने जो चाल चली है, उसने इज़राइल और अमेरिका दोनों की नींद उड़ा दी है। आइए समझते हैं, आखिर ऐसा क्या हुआ कि बी-2 बॉम्बर तक गायब हो गया और इज़राइल पर एक के बाद एक हमले हो रहे हैं। दोस्तों, हाल ही में यमन के हौती लड़ाकों ने इज़राइल पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। ये कोई साधारण रॉकेट नहीं थे—ये सटीक निशाना लगाने वाली मिसाइलें थीं। पहला वार हुआ इज़राइल के एक अहम एयरपोर्ट पर, और दूसरी मिसाइल ने सैन्य ठिकाने को हिला दिया। ज़िम्मेदारी यमन ने ली, लेकिन हर कोई जानता है कि इनके पीछे खड़ा कौन है— ईरान। ईरान लगातार यमन को हथियार, तकनीक और खुफिया जानकारी दे रहा है। उधर, अमेरिका में हड़कंप मच गया। खबरें लीक हो रही हैं कि अमेरिका का एक B-2 स्टेल्थ बॉम्बर अचानक गायब हो गया है। दोस्तों, ये वही बमवर्षक है जिसकी कीमत अरबों डॉलर है और जिसे पकड़ पाना किसी देश के लिए नामुमकिन माना जाता था। लेकिन सोशल मीडिया पर चर्चा है कि ईरान ने कोई ऐसा जवाबी कदम उठाया है जिससे ये बॉम्बर रहस्यमय तरीके से लापता हो गया। ट्रंप प्रशासन ने तुरंत इस खबर को दबाने की कोशिश की। लेकिन सवाल यह है— अगर ये सच है, तो ईरान ने आखिर किया क्या? दोस्तों, ईरान पहले ही साफ कर चुका था— “हमारे ऊपर हमला करने वालों को हम भूलेंगे नहीं। और जब जवाब देंगे, तो दुनिया चौंक जाएगी।” अमेरिका के कई ठिकानों पर हमले के बाद, ईरान ने अब इज़राइल को निशाना बनाया है। बेंजामिन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रंप दोनों खामोश हैं। क्योंकि अगर उन्होंने खुलकर कुछ कहा, तो दुनिया पूछेगी— ताकतवर होने का दावा करने वाले देश को एक छोटे देश ने कैसे घुटनों पर ला दिया? इसी बीच गाज़ा में मासूमों का खून बह रहा है। इज़राइल की सेना ने जो अत्याचार किए, उसका जवाब ईरान अब दुनिया के सामने रख रहा है। ईरान की मदद से हमास और यमन दोनों ताकतवर हुए हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने गाज़ा में 60 दिन का युद्धविराम प्रस्ताव रखा है। उन्होंने हमास से कहा— “इस प्रस्ताव को स्वीकार करो, ताकि शांति बनी रहे।” लेकिन हमास का जवाब आया— “पहले इज़राइल अपनी सेना हटाए, तभी हम बात करेंगे।” दोस्तों, कई देशों ने इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी कर दिए हैं। कई अंतरराष्ट्रीय संगठन कह चुके हैं— “नेतन्याहू हिटलर से भी ज्यादा खतरनाक है।” ईरान ने भी कहा है— “ऐसे लोगों को उनकी भाषा में जवाब देना जरूरी है।” ईरान ने अमेरिका और इज़राइल के जासूसों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। कहा—“अब कोई भी हमारे परमाणु प्रोजेक्ट में दखल नहीं देगा।” ईरान ने उन ठिकानों को फिर से खड़ा कर दिया है जिन्हें पहले अमेरिका ने तबाह किया था। ईरान अब पूरी ताकत से अपने परमाणु कार्यक्रम पर काम कर रहा है। और साफ संदेश दे रहा है— “अगर किसी ने फिर हमला करने की कोशिश की, तो अंजाम बुरा होगा।” ईरान ने इस जंग की शुरुआत की थी, और अपने दम पर इसे यहां तक पहुंचा दिया। सिर्फ 12 दिनों में इज़राइल को हिला कर रख दिया। दुनिया के तमाम देश अब कह रहे हैं— “ईरान ने साबित कर दिया कि कोई भी देश कितना भी ताकतवर हो, सही रणनीति और हौसले से उसे घुटनों पर लाया जा सकता है।” दोस्तों, ये कहानी सिर्फ हथियारों और युद्ध की नहीं है। ये कहानी है उस जज़्बे की, जो कहता है— “हम चुप नहीं बैठेंगे।” ईरान ने जो किया, उसने अमेरिका और इज़राइल दोनों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। और अब दुनिया देख रही है कि इस जंग का अगला कदम क्या होगा। अगर आप चाहते हैं कि ऐसी सच्ची और निडर पत्रकारिता जारी रहे, तो इस वीडियो को लाइक कीजिए, चैनल रविश न्यूज़ जर्नी को सब्सक्राइब कीजिए, और कमेंट में बताइए— आप किस राज्य से ये वीडियो देख रहे हैं?
