दोस्तों, जब भी एग्ज़ाम का नाम आता है, सबसे पहले हमारे दिल की धड़कन बढ़ जाती है। दिमाग में हजारों ख्याल दौड़ते हैं—अगर मैं फेल हो गया तो क्या होगा? अगर नंबर कम आए तो घरवाले क्या कहेंगे? अगर सबने मुझसे आगे निकल गया तो मेरी इज़्ज़त का क्या होगा? और यही सोच, यही डर हमें तोड़ने लगता है। लेकिन आज मैं आपको एक बात बताना चाहता हूँ—एग्ज़ाम आपकी काबिलियत को नहीं, आपकी मेहनत को परखता है।
hi
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vor 5 Monaten
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