Shahbaz khan

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@Shahbaz Firoz Khan
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पुराने ज़माने में एक छोटे से कस्बे में रहमान नाम का एक गरीब मोची रहता था। उसके पास पैसे कम थे, लेकिन दिल बहुत बड़ा था। वह हर जूते को ऐसे सीता, जैसे अपना काम इबादत समझकर कर रहा हो। एक दिन एक अमीर ताजिर उसके पास आया और बोला— “यह जूते जल्द ठीक कर दो, मैं तुम्हें जितना कहो उतना पैसा दूँगा।” लेकिन जूते खोलते ही रहमान को अंदर से एक सोने का सिका मिला। वह समझ गया कि यह सिक्का ताजिर का ही है। गरीबी उसके दरवाज़े पर रोज़ दस्तक देती थी, मगर उसने सोचा— “हराम का पैसा मेरे बच्चों को नहीं खाना।”

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