प्रार्थना से पहले आइए, पहले हम परमेश्वर के वचन को सुनें और फिर मिलकर प्रार्थना करें। भजन संहिता 1 वचन 1 से 2 में लिखा है: "क्या ही धन्य है वह मनुष्य जो दुष्टों की युक्ति पर नहीं चलता, और न पापियों के मार्ग में खड़ा होता है, और न ठट्ठा करने वालों की मण्डली में बैठता है, परन्तु यहोवा की व्यवस्था से प्रसन्न रहता है, और उसकी व्यवस्था पर रात-दिन ध्यान करता है।" यह भजन दो रास्तों का स्पष्ट अंतर दिखाता है—धर्मी का मार्ग और दुष्ट का मार्ग। यह हमें याद दिलाता है कि आशीष
hi
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5 месяцев назад
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