### **तिलकठ का किंग** आरव बचपन से ही अलग था। जब उसके दोस्त क्रिकेट खेलते थे, तब वह अपनी दादी के साथ रसोई में बैठकर तिल और गुड़ की खुशबू में खो जाता था। उसे तिलकठ बनाना सिर्फ काम नहीं, एक कला लगता था। बिहार के एक छोटे से गाँव में पला-बढ़ा आरव मुश्किल से 15 साल का था, जब उसके पिता की मिठाई की छोटी-सी दुकान बंद होने की कगार पर थी। बाजार में बड़े-बड़े ब्रांड आ चुके थे और ग्राहकों की भीड़ कम होती जा रही थी। एक दिन आरव ने हिम्मत जुटाकर पिता से कहा, “बाबा, इस बार मकर संक्रांति पर हम कुछ नया करेंगे।” उसने तिलकठ को नए आकार और स्वाद में तैयार किया—चॉकलेट तिलकठ, ड्राई फ्रूट तिलकठ और यहाँ तक कि केसरिया तिलकठ भी। उसने सोशल मीडिया पर वीडियो बनाकर डालना शुरू किया। गाँव के लोग पहले हँसे, लेकिन धीरे-धीरे उसके वीडियो वायरल होने लगे। 17 साल की उम्र में उसने अपनी दुकान का नाम रखा—**“तिलकठ किंग”**। 18 साल की उम्र में पास के शहरों से ऑर्डर आने लगे। 19 साल की उम्र में उसने ऑनलाइन डिलीवरी शुरू कर दी। और जब वह 20 साल का हुआ, तब तक उसका नाम पूरे राज्य में मशहूर हो चुका था। लोग उसे प्यार से **“तिलकठ का किंग”** कहने लगे। एक बार बिहार राज्य व्यापार मंडल ने उसे युवा उद्यमी पुरस्कार से सम्मानित किया। मंच पर खड़े होकर आरव ने कहा— “मैंने सिर्फ तिल और गुड़ को नहीं मिलाया, मैंने अपने सपनों को मेहनत से जोड़ा है।” उसकी कहानी यह सिखाती है कि उम्र छोटी हो सकती है, लेकिन सपने बड़े होने चाहिए। अगर लगन सच्ची हो, तो 20 साल की उम्र भी किसी को “किंग” बना सकती है। 👑
