Danish

Danish

@Ad khan
0Uses
0Shares
0Likes
0Saved by

नमस्कार दोस्तो, मैं धुरुव राठी और आपका स्वागत है हमारे नए शो रियल सच रिपोर्ट में। डोनाल्ड ट्रंप को लगा था कि जैसे ही वह टेरिफ लगाएंगे, भारत डरकर अमेरिका के पास आ जाएगा। लेकिन हुआ ठीक इसका उल्टा। जैसे ही अमेरिका ने भारत पर 25% का टेरिफ लगाया, भारत ने तुरंत अपने सारे सामान का निर्यात रोक दिया। जिससे ट्रंप को घुटने टेकने पड़े। भारत ने अमेरिका को साफ संदेश दे दिया कि अब परमाणु हथियारों की धमकियां, टेरिफ की धमकी और दादागिरी नहीं चलेगी। भारत अब गोली का जवाब मिसाइल से देगा और टेरिफ का जवाब प्रतिबंध से देगा। क्योंकि यह एक नया भारत है जो ना झुकता है, ना डरता है और ना ही किसी के सामने आंखें मिलाने से पीछे हटता है। क्या है पूरी खबर? चलिए जानते हैं। लेकिन उससे पहले अगर आपने अभी तक इस वीडियो को लाइक और हमारे चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया है तो जल्दी से कर लीजिए क्योंकि लोग बिना कपड़ों के नंगी होकर नाचने वाली लड़कियों को बहुत लाइक सब्सक्राइब करते हैं। लेकिन अपने भारत देश की देशभक्ति कहीं गुम होती जा रही है। तो आज इस चैनल को सब्सक्राइब करके वीडियो को एक लाइक जरूर कर दें ताकि हमें भी पता चले कि कितने लोग ऐसे हैं जो आज भी भारत की ताकत और महानता को सलाम करते हैं। आज भी उनके अंदर देशभक्ति जिंदा है। तो चलिए वीडियो शुरू करते हैं। अमेरिका द्वारा भारत पर 25% टेरिफ लगाने की घोषणा के 12 घंटे के भीतर ही डोनाल्ड ट्रंप को झटके लगने शुरू हो गए। ट्रंप शायद यह भूल गए थे कि अब भारत किसी के दबाव में नहीं आता। भारत अब दुनिया के साथ अपने रिश्तों को अपनी शर्तों पर तय करता है। अगर अमेरिका को भारत के साथ व्यापार करना है तो उसे भारत की शर्तों पर ही करना होगा। वरना भारत के पास रूस, ईरान और मध्यपूर्व जैसे और भी कई विकल्प हैं। दरअसल, ट्रंप ने भारत पर 25% टेरिफ लगाते समय यह सोचा था कि भारत दबाव में आकर झुक जाएगा और अमेरिका से समझौते की भीख मांगेगा। लेकिन उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि यह वो भारत नहीं है जो पहले दूसरों के इशारों पर चलता था। मोदी सरकार ने सबसे पहले यह निर्णय लिया कि जो दवाइयां, फार्मा उत्पाद, आईटी सेवाएं और अन्य सामान अमेरिका को भेजे जाते थे, उनका रुख अब अफ्रीका, ब्रिटेन, मध्य पूर्व और रूस जैसे भरोसेमंद बाजारों की ओर मोड़ा जाएगा। भारत ने स्पष्ट कर दिया कि व्यापार सम्मान के साथ होता है। दबाव के साथ नहीं। अगर हम फार्मा सेक्टर की बात करें तो अमेरिका आज भी कई भारतीय दवाओं पर खासकर जेनेरिक दवाओं पर बहुत हद तक निर्भर है। जैसे ही भारत ने यह संकेत दिया कि इन दवाओं की सप्लाई अब रूस को की जाएगी, अमेरिका में हलचल मच गई। भारत ने रूस के साथ बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य और मेडिकल आदानप्रदान के लिए एक बड़ा समझौता भी कर लिया है। अब भारत रूस को एंटीबायोटिक्स, कैंसर की दवाएं और अन्य मेडिकल उत्पाद भेजेगा। इसी बीच ट्रंप ने सोशल मीडिया पर भारत और रूस की अर्थव्यवस्थाओं को डेड इकॉनमी मृत अर्थव्यवस्था कह डाला। लेकिन सच्चाई यह है कि जिस भारत को वो मृत अर्थव्यवस्था कह रहे हैं, उसी भारत की अर्थव्यवस्था को आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बता रहे हैं। भारत की विकास दर 6.4% है। जबकि अमेरिका की 1.9% है। इसका मतलब है कि ट्रंप अपनी खुद की विफलता को छुपाने के लिए भारत पर उंगली उठा रहे हैं और टेरिफ की धमकी दे रहे हैं। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झुकने से साफ इंकार कर दिया। मोदी जी ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत अपने किसानों, उद्यमियों, एमएसएमई और घरेलू व्यापार के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। पिछले 6 महीनों से चल रही बातचीत में ट्रंप भारत को झुकाना चाहते थे। लेकिन मोदी जी ने साफ कह दिया कि हम नहीं झुकेंगे। चाहे आप जितना टेरिफ लगा लें। आज का भारत वो पुराना भारत नहीं है जिसे 1991 में अपना सोना गिरवी रखना पड़ा था। आज का भारत अमेरिका को आंख से आंख मिलाकर जवाब देता है। आज भारत ब्रिटेन के साथ मुक्त व्यापार समझौता कर रहा है और दुनिया की शीर्षार अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। जब ट्रंप जैसे नेता भारत को मृत अर्थव्यवस्था कहते हैं तो वे असल में अपनी जलन और बौखलाहट दिखा रहे हैं। भारत के इस कड़े जवाब के लिए कमेंट बॉक्स में जय हिंद का एक नारा जरूर लगाएं ताकि ट्रंप सरकार को भी पता चल जाए कि भारत की जनता जाग चुकी है और अपनी सरकार के साथ मिलकर अमेरिका को धूल चटाएगी। आपको बता दें कि वहीं दूसरी तरफ डोनाल्ड ट्रंप को घुटने पर लाने के लिए रूस ने भी भारत को अपना सबसे उन्नत फाइटर जेट सुखोई 57 देने की बात पक्की कर दी है। यानी एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप भारत पर टेरिफ लगाकर रूस के साथ कोई भी सौदा ना करने का दबाव बना रहे थे। वहीं दूसरी तरफ भारत चुपचाप रूस के साथ अपने रक्षा संबंधों को और भी मजबूत कर रहा था। ट्रंप को यह समझ ही नहीं आया कि उन्होंने भारत को दबाने की कोशिश की या उसे वैश्विक व्यापार के नए रास्तों पर धकेल दिया। जैसे ही भारत ने अमेरिका से हटकर अन्य बाजारों में अपने उत्पादों को भेजना शुरू किया अफ्रीकी देशों ने इसका खुले दिल से स्वागत किया। भारत ने फार्मा, टेक्सटाइल, ऑटो पार्ट्स, स्टील और आईटी सेवाओं जैसे क्षेत्रों में अपने निर्यात को इन देशों की तरफ मोड़ दिया। अमेरिका को दूसरा बड़ा झटका तब लगा जब भारत ने यह ऐलान किया कि अब अमेरिका से कोई भी बड़ी रक्षा डील नहीं की जाएगी। प्रस्तावित फाइटर जेट्स, ड्रोंस और रक्षा टेक्नोलॉजी से संबंधित डील को रद्द कर दिया गया। अमेरिका को उम्मीद थी कि भारत उसके एफ 35 को खरीदेगा। लेकिन भारत ने साफ कह दिया कि हमें अब आपसे कोई डील नहीं करनी। और इसी बीच भारत ने रूस से Sukhoi 57 की खरीद की प्रक्रिया को तेज कर दिया। यह वही फाइटर जेट है जिसे दुनिया के सबसे खतरनाक स्टील फाइटर में गिना जाता है। रूस ने भारत को केवल यह फाइटर जेट देने का ऐलान किया बल्कि इसके साथ टेक्नोलॉजी, ट्रांसफर और संयुक्त उत्पादन का प्रस्ताव भी दिया। इतना ही नहीं रूस ने भारत को इसे बेचने की भी अनुमति दे दी है। इसका मतलब है कि इस सौदे के बाद भारत अब पांचवी पीढ़ी के फाइटर जेट बनाकर बेच भी सकता है। रूस के अलावा ब्रिटेन, फ्रांस, उत्तर कोरिया और जापान जैसे देशों ने भी भारत का समर्थन किया और नए व्यापार समझौतों की पेशकश की। जिस टेरिफ के दम पर ट्रंप भारत को घुटनों पर लाना चाहते थे, उसी टेरिफ ने उल्टा ट्रंप को ही घुटनों पर ला दिया है। डोनाल्ड ट्रंप सिर्फ भारत को ही नहीं बल्कि रूस और चीन को भी धमका रहे थे

hi
Public
Use Voice
Samples
There's no audio samples yet