आज गर्व से कहना चाहता हूँ कुशवाहा समाज मेहनत की पहचान है। जिसने धरती से रिश्ता जोड़ा, जिसने हल को सम्मान बनाया, वही समाज देश को अन्न देता है। कुशवाहा सिर्फ़ एक जाति नहीं, ये संस्कृति है, परंपरा है, और आत्मसम्मान की मिसाल है।
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