सूरह अल-बक़रह... शुरू अल्लाह के नाम से... जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम वाला है। अलिफ़... लाम... मीम... यह अल्लाह की किताब है। इसमें कोई शक नहीं। यह राह दिखाती है... उन लोगों को, जो अल्लाह का डर रखते हैं। जो यक़ीन करते हैं बिन देखे... और नमाज़ क़ायम करते हैं। और जो कुछ हमने उन्हें दिया है... उसमें से ख़र्च करते हैं। और जो ईमान लाते हैं उस पर, जो तुम्हारे ऊपर उतारा गया... और जो तुमसे पहले उतारा गया। और वे आख़िरत पर... पूरा यक़ीन रखते हैं। इन्हीं लोगों ने अपने रब की राह पाई है... और वही कामयाबी को पहुँचने वाले हैं। जिन लोगों ने इंकार किया... उनके लिए समान है, कि तुम उन्हें डराओ... या न डराओ। वे मानने वाले नहीं हैं। अल्लाह ने उनके दिलों पर... और उनके कानों पर मुहर लगा दी है। और उनकी आँखों पर पर्दा है। और उनके लिए... बहुत बड़ा अज़ाब है।" "और लोगों में कुछ ऐसे भी हैं... जो कहते हैं कि हम ईमान लाए अल्लाह पर, और आख़िरत के दिन पर। हालाँकि... वे ईमान वाले नहीं हैं। वे अल्लाह को और मोमिनों को धोखा देना चाहते हैं। मगर... वे सिर्फ़ अपने आपको धोखा दे रहे हैं, और वे इसका शुऊर नहीं रखते। उनके दिलों में रोग है... तो अल्लाह ने उनके रोग को और बढ़ा दिया। और उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है... इस वजह से, कि वे झूठ कहते थे। और जब उनसे कहा जाता है कि धरती पर फ़साद न करो... तो वे जवाब देते हैं, कि हम तो सुधार करने वाले हैं। जान लो... यही लोग फ़साद करने वाले हैं, मगर वे नहीं समझते। और जब उनसे कहा जाता है, कि तुम भी उसी तरह ईमान ले आओ... जिस तरह अन्य लोग ईमान लाए हैं, तो कहते हैं... कि क्या हम उस तरह ईमान लाएँ, जिस तरह मूर्ख लोग ईमान लाए हैं? जान लो... कि मूर्ख यही लोग हैं, मगर वे नहीं जानते। और जब वे ईमान वालों से मिलते हैं, तो कहते हैं कि हम ईमान लाए हैं। और जब अपने शैतानों की बैठक में पहुँचते हैं... तो कहते हैं कि..." तुम्हारे साथ हैं... हम तो उनसे महज़ हंसी करते हैं। अल्लाह उनसे हंसी कर रहा है... और उन्हें उनकी सरकशी में ढील दे रहा है। वे भटकते फिर रहे हैं। ये वे लोग हैं... जिन्होंने हिदायत के बदले गुमराही ख़रीदी। तो उनकी तिजारत फ़ायदेमंद नहीं हुई... और वे न हुए राह पाने वाले। "उनकी मिसाल ऐसी है... जैसे एक शख्स ने आग जलाई। जब आग ने उसके इर्द-गिर्द को रोशन कर दिया... तो अल्लाह ने उनकी आँख की रोशनी छीन ली, और उन्हें अंधेरे में छोड़ दिया कि उन्हें कुछ दिखाई नहीं पड़ता। वे बहरे हैं... गूँगे हैं... अंधे हैं। अब ये लौटने वाले नहीं हैं। या उनकी मिसाल ऐसी है, जैसे आसमान से बारिश हो रही हो... उसमें अंधकार भी हो और गरज-चमक भी। वे कड़क से डर कर मौत से बचने के लिए... अपनी उंगलियाँ अपने कानों में ठूंस रहे हों। हालाँकि अल्लाह इंकार करने वालों को अपने घेरे में लिए हुए है। क़रीब है कि बिजली उनकी निगाहों को उचक ले। जब भी उन पर बिजली चमकती है... उसमें वे चल पड़ते हैं, और जब उन पर अंधेरा छा जाता है... तो वे रुक जाते हैं। और अगर अल्लाह चाहे तो उनके कान और उनकी आंखों को छीन ले। अल्लाह यक़ीनन हर चीज़ पर क़ादिर है। ऐ लोगो! अपने रब की इबादत करो... जिसने तुम्हें पैदा किया और उन लोगों को भी जो तुम से पहले गुज़र चुके हैं... ताकि तुम दोज़ख से बच जाओ। वह ज़ात जिसने ज़मीन को तुम्हारे लिए बिछौना बनाया और आसमान को छत बनाया... और उतारा आसमान से पानी, और उससे पैदा किए फल तुम्हारी ग़िज़ा के लिए। पस तुम किसी को अल्लाह के बराबर न ठहराओ... हालांकि तुम जानते हो। अगर तुम इस कलाम के संबंध में शक में हो... जो हमने अपने बंदे के ऊपर उतारा है... तो लाओ इस जैसी एक सूरह, और बुला लो अपने हिमायतियों को भी अल्लाह के सिवा... अगर तुम सच्चे हो। पस अगर तुम यह न कर सको... और हरगिज़ न कर सकोगे... तो डरो उस आग से जिसका ईंधन बनेंगे आदमी और पत्थर। वह तैयार की गई है हक़ का इंकार करने वालों के लिए। और खुशखबरी दे दो उन लोगों को जो ईमान लाए और जिन्होंने नेक काम किए... इस बात की, कि उनके लिए ऐसे बाग़ होंगे जिनके नीचे नहरें जारी होंगी। जब भी उन्हें इन बाग़ों में से कोई फल खाने को मिलेगा... तो वे कहेंगे यह वही है जो इससे पहले हमें दिया गया था। और मिलेगा उन्हें एक-दूसरे से मिलता-जुलता। और उनके लिए वहां साफ़-सुथरी औरतें होंगी... और वे इसमें हमेशा रहेंगे। अल्लाह इससे नहीं शर्माता... कि बयान करे मिसाल मच्छर की, या इससे भी किसी छोटी चीज़ की। फिर जो ईमान वाले हैं वे जानते हैं कि वह हक़ है... उनके रब की जानिब से। और जो इंकार करने वाले हैं वे कहते हैं कि इस मिसाल को बयान करके अल्लाह ने क्या चाहा है। अल्लाह इसके ज़रिए बहुतों को गुमराह करता है और बहुतों को इससे राह दिखाता है। और वह गुमराह करता है उन लोगों को... जो नाफ़रमानी करने वाले हैं। जो अल्लाह के अहद को उसके बांधने के बाद तोड़ते हैं... और उस चीज़ को तोड़ते हैं जिसे अल्लाह ने जोड़ने का हुक्म दिया है... और ज़मीन में बिगाड़ पैदा करते हैं। यही लोग हैं नुक्सान उठाने वाले। तुम किस तरह अल्लाह का इंकार करते हो... हालांकि तुम बेजान थे, तो उसने तुम्हें ज़िंदगी अता की। फिर वह तुम्हें मौत देगा... फिर ज़िंदा करेगा। फिर उसी की तरफ़ लौटाए जाओगे। वही है जिसने तुम्हारे लिए वह सब कुछ पैदा किया जो ज़मीन में है। फिर आसमान की तरफ़ तवज्जोह की... और सात आसमान दुरुस्त किए। और वह हर चीज़ को जानने वाला है। और जब तेरे रब ने फ़रिश्तों से कहा... कि मैं ज़मीन में एक ख़लीफ़ा बनाने वाला हूं। फ़रिश्तों ने कहा... क्या तू ज़मीन में ऐसे लोगों को बसाएगा जो इसमें फ़साद करें और खून बहाऐं? और हम तेरी हम्द करते हैं और तेरी पाकी बयान करते हैं। अल्लाह ने कहा... मैं जानता हूं जो तुम नहीं जानते। और अल्लाह ने सिखा दिए आदम को सारे नाम... फिर उन्हें फ़रिश्तों के सामने पेश किया और कहा कि अगर तुम सच्चे हो... तो मुझे इन लोगों के नाम बताओ। फ़रिश्तों ने कहा कि तू पाक है। हम तो वही जानते हैं जो तूने हमें बताया... बेशक तू ही इल्म वाला और हिकमत वाला है। अल्लाह ने कहा... ऐ आदम! उन्हें बताओ उन लोगों के नाम। तो जब आदम ने बताए उन्हें उन लोगों के नाम... तो अल्लाह ने कहा: क्या मैंने तुम से नहीं कहा था कि आसमानों और ज़मीन के भेद को मैं ही जानता हूं। और मुझे मालूम है जो तुम ज़ाहिर करते हो और जो तुम छुपाते हो। और जब हमने फ़रिश्तों से कहा कि आदम को सज्दा करो... तो उन्होंने सज्दा किया। मगर इब्लीस ने नहीं किया। उसने इंकार किया और घमंड किया... और मुंकिरों में से हो गया। और हमने कहा... ऐ आदम! तुम और तुम्हारी बीवी दोनों जन्नत में रहो और उसमें से खाओ खुले रूप में जहां से चाहो। और उस दरख़्त के नज़दीक मत जाना... वर्ना तुम ज़ालिमों में से हो जाओगे। फिर शैतान ने उस दरख़्त के ज़रिए दोनों को लग़ज़िश में मुब्तिला कर दिया... और उन्हें उस ऐश से निकलवा दिया जिसमें वे थे। और हमने कहा तुम सब उतरो यहां से। तुम एक दूसरे के दुश्मन होगे। और तुम्हारे लिए ज़मीन में ठहरना और काम चलाना है... एक मुद्दत तक। फिर आदम ने सीख लिए अपने रब से कुछ बोल..."