Premanand maharaj ji

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Medium Short Copy Download 00:00 ऐसा कैसे निश्चय कर लिया कि भजन नहीं हो रहा है? क्यों नहीं हो रहा है? क्यों नहीं होगा? हमारा मानव जीवन वह संपूर्ण शक्ति संपन्न है जिससे भगवत प्राप्ति करनी है। बिना भजन के भगवत प्राप्ति असंभव है। भजन हमारा जीवन आज हम सुबह साधकों से यही कह रहे थे। लोग जीते कैसे हैं बिना भजन के? विषय सेवन, विषय चिंतन, प्रपंच चिंतन यह सब बन सकता है। भजन नहीं बन सकता। कैसी बात करते हो? प्रयासरत क्यों नहीं हो? इतना क्यों इंद्रिय और मन को प्रोत्साहन दे दिया विषयों के लिए कि वो भजन के लिए ना बोल दिया कि भजन ना बने तो भगवत प्राप्ति के। किस उद्देश्य का पालन Show less 00:59 करने के लिए मानव जीवन प्राप्ति किए? क्या उद्देश्य है? क्या रुपया, समाज प्रियता, मान प्रतिष्ठा यह सब यही धरी रह जाएगी। इंद्रियों का दुलार, मन का दुलार यह नर्क की प्राप्ति कराएगा। हम भगवान के निज अंश हैं। हम भगवान के भक्तों के संग से अपने मन को जबरदस्ती बलात भजन में लगाएंगे। हम अविनाशी भगवान के अंश हैं। हम क्या नहीं कर सकते? यह कैसे कह दिया कि हम भजन नहीं कर सकते? नहीं बिल्कुल गलत निरत्साहित होकर ऐसे वचन ना बोलने चाहिए और ना ऐसे वचनों को सुनना चाहिए। भजन नहीं कर सकते और सब कर सकते हैं। हमारी वाणी है बोल सकते हैं तो राम Read More 01:48 क्यों नहीं बोले? राधा क्यों ना बोले? कृष्ण क्यों ना बोले? मृदु क्यों ना बोले? हितकर क्यों ना बोले? हाथ है तो हम परोपकार क्यों ना करें? पैर है तो हम प्रदक्षिणा क्यों ना करें? हृदय है तो हम भगवान को समर्पित क्यों ना करें? अग्न साधन सब शून्य है। भगवान का नाम जप ही अंक है। जैसे अंक रखने से शून्य 10 गुना महत्व रखता है। अंक हटा देने पर शून्य का कोई महत्व नहीं। ऐसे ही भगवत चिंतन शून्य हर सत क्रिया यहां से ब्रह्मलोक तक ले जाएगी। लेकिन ब्रह्मलोक भी नाशवान है। आह स्तंभ पर्यंतम सर्वम मायामयं जगत सत्यम सत्यम Read More 02:31 पुन सत्यम हरे नाम केवलम हमें ऐसा नहीं बोलना आप क्योंकि भजन कर रहे हैं। कर रहे हैं। समाज के लिए प्रश्न है लेकिन बिल्कुल हम इस बात को सुनना नहीं चाहेंगे कि हमसे भजन नहीं होता। भजन होता सिद्धों से है। साधक को जबरदस्ती भजन करना पड़ता है। हम अभ्यास योग युक्त चेतसा नाम निगामिना हम ऐसा अभ्यास इस जन्म में करेंगे। हमारा भगवान को छोड़कर और कोई चिंतन ही ना करे। अभ्यास के द्वारा अभ्यास के द्वारा सब कुछ किया जा सकता है। हम निराश हताश उदास ऐसे व्यक्ति नहीं ऐसे व्यक्तित्व नहीं होना चाहिए। किसी भी स्थिति में, किसी भी कार्य प्रणाली में,

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