Sumit

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@Sumit
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भूतिया स्टेशन का रहस्य नॉरेटर डरावनी आवाज में ये किस्सा है 2018 का, जब मैं और मेरे तीन दोस्त — अमन, राहुल और दीपक — एक ट्रिप पर निकले थे। हम सभी कॉलेज में पढ़ते थे और एडवेंचर के शौकीन थे। गर्मियों की छुट्टियों में हमने सोचा कि चलो किसी अद्भुत जगह घूमने चलते हैं। राहुल ने एक जगह का नाम सुझाया — "कालवाड़ी स्टेशन"। यह स्टेशन हमारे शहर से करीब 200 किलोमीटर दूर था। कहते हैं कि ये स्टेशन पिछले 20 सालों से बंद पड़ा है। लोग बताते हैं कि वहां अजीब आवाज़ें, साये, और हादसे होते हैं, इसीलिए रेलवे ने उस स्टेशन को बंद कर दिया। पर हमारे जैसे लड़कों को तो ऐसी ही जगहों की तलाश रहती थी। हमने तुरंत बाइक निकाली और शाम होते-होते वहां पहुँचने का प्लान बना लिया। स्टेशन का माहौल शाम को करीब 5 बजे हम वहां पहुँचे। सूरज ढल रहा था और चारों ओर गहरा सन्नाटा था। स्टेशन की इमारत जर्जर हो चुकी थी — दीवारों पर काई लगी हुई थी, खिड़कियों के शीशे टूटे हुए थे, और प्लेटफॉर्म पर जंग लगे बोर्ड पर बस धुंधले अक्षरों में लिखा था — "कालवाड़ी स्टेशन"। हमने मस्ती में फोटो खींचने शुरू कर दिए। तभी अचानक हवा का झोंका आया और स्टेशन के अंदर से किसी के कराहने की आवाज़ आई। हमने एक-दूसरे की तरफ देखा — थोड़ा डर जरूर लगा, लेकिन उत्सुकता ज्यादा थी। राहुल ने कहा, "चलो अंदर चलते हैं, देखते हैं कौन है।" हम चारों मोबाइल की टॉर्च ऑन कर अंदर घुस गए। अंदर का खौफनाक नज़ारा स्टेशन का वेटिंग हॉल किसी कब्रिस्तान जैसा लग रहा था। टूटी हुई बेंचें, फर्श पर मिट्टी और कांच बिखरा हुआ, और दीवारों पर अजीब-अजीब निशान थे, जैसे किसी ने नाखूनों से खुरच-खुरच कर बनाए हों। दीपक ने मजाक में कहा, "लगता है कोई आत्मा यहाँ बोर हो गई थी, इसलिए आर्ट बना रही थी।" हम सब हंस पड़े, लेकिन तभी... ठक-ठक-ठक। किसी के चलने की आवाज़ आई। हमने तुरंत टॉर्च उस दिशा में घुमा दी, लेकिन वहां कुछ नहीं था। "किसी जानवर की आवाज़ होगी," अमन बोला। लेकिन आवाज़ अब तेज़ हो रही थी, जैसे कई पैर एक साथ चल रहे हों। और फिर अचानक... दरवाज़ा अपने आप बंद हो गया। अब हम सब सच में डर गए थे। भाग कर दरवाजा खोलने गए, लेकिन जैसे ही उसे छूआ — ऐसा लगा जैसे किसी ने अंदर से पकड़ लिया हो। दीपक चीख पड़ा, "कोई अंदर है! छोड़ो मुझे!" हमने जोर लगाकर दरवाजा खोला, और किसी तरह बाहर आ गए। पर ये तो बस शुरुआत थी... रात का डरावना खेल हमने सोचा कि अब हमें वापस चल देना चाहिए, लेकिन तभी अमन ने देखा कि हमारी तीनों

hi
عام
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