प्रिय आत्मन मनुष्य का सबसे बड़ा खजाना बाहर कहीं नहीं है। ना धन है ना सत्ता है ना ही कोई दौलत। मनुष्य का असली खजाना है चाहना। चाहना क्या है? चाहना है भीतर उठने वाली आग। चाहना है वह पुकार जो आत्मा की गहराइयों से उठती है। चाहना है वह बीज
hi
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há 5 meses
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