सत्रहवीं सदी का भारत… शक्तिशाली साम्राज्यों की छाया में दबा हुआ। लगता था कि किसी में इतना साहस नहीं जो उन्हें चुनौती दे सके। लेकिन पहाड़ों के बीच एक किले में एक बालक जन्म ले चुका था—Chhatrapati Shivaji Maharaj। 1630 में Shivneri Fort में जन्मा यह बालक आगे चलकर इतिहास की दिशा बदलने वाला था। धीरे-धीरे उसने साथियों को जोड़ा, किलों पर अधिकार किया और एक नए स्वराज्य का सपना देखा। उस समय विशाल शक्ति था Mughal Empire, लेकिन शिवाजी ने ताकत से नहीं, बुद्धि और गुरिल्ला युद्धनीति से मुकाबला किया। उन्होंने अपनी प्रजा की रक्षा की, महिलाओं के सम्मान को नियम बनाया और न्याय को शासन की नींव रखा। समुद्र तक अपनी शक्ति फैलाते हुए उन्होंने मजबूत नौसेना भी खड़ी की। फिर 1674 में Raigad Fort पर उनका राज्याभिषेक हुआ… और स्वराज्य की घोषणा गूंज उठी। कभी-कभी इतिहास तलवार से नहीं, संकल्प से लिखा जाता है… और शिवाजी महाराज उसका सबसे जीवित प्रमाण हैं। 🚩