सोचिए… अगर आपके पास Google Maps या GPS न हो… तो आप रास्ता कैसे ढूँढेंगे? आज हम बिना सोचे-समझे मोबाइल से… दुनिया के किसी भी कोने का रास्ता निकाल लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं… हज़ारों साल पहले इंसान ने सबसे पहले कंपास और नक्शे बनाकर ही… पूरी दुनिया को नापा था?" "इतिहासकार बताते हैं… सबसे पहला नक्शा करीब 5000 साल पहले बाबुल में बनाया गया था। ये नक्शा मिट्टी की तख्ती पर उकेरा गया था… जहाँ सिर्फ नदियाँ और शहर दिखाए जाते थे। धीरे-धीरे… मिस्र, ग्रीक और भारत की सभ्यताओं ने भी अपने-अपने नक्शे बनाए। लेकिन असली क्रांति तब आई… जब चीन में कंपास का जन्म हुआ। 9वीं सदी में… चीनी लोग ‘लॉजस्टोन’ नामक चुंबकीय पत्थर का इस्तेमाल करने लगे। ये पत्थर जब लटकाया जाता था… तो हमेशा उत्तर दिशा की ओर इशारा करता था।" --- "समंदर के बीच… जहाँ चारों तरफ सिर्फ पानी होता था… नाविकों के लिए रास्ता ढूँढना लगभग असंभव था। लेकिन… कंपास ने सब बदल दिया। 10वीं से 12वीं सदी तक ये तकनीक अरब व्यापारियों के पास पहुँची… और फिर यूरोप तक फैल गई। यहीं से शुरू हुआ — ‘महान खोजों का युग’। क्रिस्टोफर कोलंबस ने अमेरिका खोजा… वास्को-ड-गामा भारत पहुँचा… और ये सब संभव हुआ… सिर्फ कंपास और नक्शों की वजह से। "पहले नक्शे बहुत साधारण थे… लेकिन 16वीं सदी में आया Mercator Projection। यानि… पहली बार पूरी धरती का गोल आकार… एक सपाट नक्शे पर दिखाया गया। यही नक्शा आज भी… स्कूलों की किताबों और दीवारों पर दिखता है। फिर समय बदला… दूरबीन और खगोल विज्ञान ने नक्शों को और सटीक बना दिया। 19वीं और 20वीं सदी तक… उपग्रह और एरियल फोटोग्राफी ने… पूरी दुनिया का नक्शा तैयार कर दिया।" --- "आज हम Google Maps और GPS का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन याद रखिए… ये सब उसी कंपास और उन पहले नक्शों की नींव पर खड़ा है। सोचिए… अगर इंसान ने दिशा बताने का तरीका न खोजा होता… तो शायद न अमेरिका की खोज होती, न भारत में यूरोपीय आते… और न ही आज की दुनिया वैसी होती… जैसी हम देखते हैं।"
