एक आदमी रोज़ नदी से दो घड़े में पानी लाता था — एक सही था, दूसरा टूटा हुआ।टूटे घड़े को लगता — “मुझसे आधा पानी ही पहुँचता है… मैं बेकार हूँ।” मैंने तुम्हारी कमी को समझकर वहाँ बीज बो दिए… और उन्हीं फूलों से मंदिर सजता है।”हर कमजोरी में भी ताकत होती है — खुद को कम मत समझो।
hi
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hace 9 meses
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