पहाड़ों में एक घर हो बिल्कुल सपने जैसा चाहिए। घर में ऐसा शख्स जिसको बेपनाह मोहब्बत हो और होगा जो भी बच्चा बिल्कुल अपने जैसा चाहिए। पर ख्वाब होंगे सच जरूरी तो नहीं है। यह जिंदगी अधूरी नहीं पूरी हो सकी है। मैं अपने आप को भी अब पहचान नहीं पाता। जब से जिम्मेदारी आई खुद से दूरी जो बड़ी है। मैं लिखना भी नहीं चाहता। मेरा खुदा सब लिखवाता है। वो खुशियों से ज्यादा मुझे दर्द से मिलवाता है। समझ आया मुझे कि इंसान जितना टूटा हो वो जिंदगी को उतनी ही गहराई से पढ़ पाता है। दवा मेरी शराब बन चुकी है। मेरी जिंदगी मानो कोई मजाक बन चुकी है।
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2 个月前
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