जब हनुमान जी बाल रूप में थे तो उनकी भूख और शक्ति दोनों असीम थीं। एक सुबह आकाश में लाल चमकता सूरज उन्हें एक मीठा फल जैसा लगा। बाल हनुमान ने बिना देर किए सूर्य को पकड़ने उड़ान भर ली। देवलोक में हलचल मच गई। इंद्र समझ गए कि यह साधारण बालक नहीं साक्षात वायु पुत्र हनुमान हैं। जैसे ही हनुमान ने सूर्य को पकड़ा तीनों लोकों में अंधेरा फैलने लगा। देवताओं ने प्रार्थना की कि सूर्य ही जीवन का आधार है उसे मुक्त किया जाए। वायु देव की विनती पर और ब्रह्मा जी के हस्तक्षेप से हनुमान ने सूर्य को छोड़ दिया। इस घटना से देवताओं को समझ आ गया कि यह बालक भविष्य में अधर्म का अंत करने वाला महाबली बनेगा।
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