Premanand Ji Maharaj

Premanand Ji Maharaj

@Amit Tiwari
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हाँ महाराज जी, जब शरीर भगवान का दिया हुआ है, तो उसके अंग भी उन्हीं के। एक राधा है, दूसरी कृष्ण। दोनों साथ हैं, तो मुझे क्या चिंता? सही कहा आपने। भक्ति वही है, जहाँ सुख-दुख बराबर लगें। (थोड़ा रुककर) पर बताइए, आजकल युवा पीढ़ी भक्ति से इतनी दूर क्यों भाग रही है? आप भी कम नहीं हैं महाराज जी। आपकी वाणी में वही रस है जो किसी को भी खींच ले। लेकिन एक बात बताइए—क्या केवल ग्रंथ पढ़ने से भक्ति आती है?

hi
عام
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