अस्पताल से लौटने के बाद नेहा के मन में एक ही खयाल घूमता रहा। उसे लगने लगा था कि उसने ज़िंदगी में जो कुछ खोया है, वह उसकी अपनी गलतियों की वजह से है। वर्दी का घमंड, गलत रिश्ता और अपनों से दूरी—सब कुछ अब उसे काटने लगा था। उसे लगा कि अगर एक बार वह रवि से मिल ले, तो शायद हल्का महसूस करे। कुछ दिन बाद वह बाज़ार में अकेली सामान लेने निकली। चलते-चलते अचानक सामने एक जानी-पहचानी शक्ल आ खड़ी हुई। वह उसकी सास थी। नेहा ठिठक गई। उसने धीमी आवाज़ में कहा, “माँ जी, आप कैसी हैं?” लेकिन उसकी सास ने चश्मा उतारकर उसे ठीक से देखा और कहा, “तुम कौन हो? और मुझे माँ क्यों कह रही हो?” नेहा की आँखें भर आईं। उसने बताया कि वह नेहा है। तब जाकर सास ने उसे पहचाना, लेकिन चेहरे पर कोई अपनापन नहीं था। उन्होंने साफ कहा कि जिसने उनके बेटे को ठुकरा दिया, उससे उन्हें कोई बात नहीं करनी। नेहा वहीं खड़ी गिड़गिड़ाती रही। माफी माँगती रही। लेकिन सास का दिल नहीं पिघला। उन्होंने सिर्फ़ इतना कहा कि हर इंसान को अपने कर्मों का फल खुद भुगतना पड़ता है और वे अपना सामान लेकर आगे बढ़ गईं। नेहा के कदम वहीं जमे रह गए। उस दिन उसे पहली बार अहसास हुआ कि माफी माँगना भी हर किसी को नसीब नहीं होता। उधर रवि और उसकी माँ की ज़िंदगी पटरी पर लौट चुकी थी। घर का काम अच्छे से चल रहा था। बेटा पढ़ने लगा था। हँसी-खुशी लौट आई थी। माँ बाज़ार में सामान लेने गई थीं, तभी नेहा ने उन्हें दूर से देख लिया। उसने हिम्मत जुटाकर उन्हें आवाज़ दी। माँ ने उसे देखा, पहचाना भी, लेकिन नज़रें फेर लीं। उन्होंने कहा कि उन्हें उससे कोई बात नहीं करनी। नेहा रोती रही, हाथ जोड़ती रही, लेकिन माँ चुपचाप अपना काम करके चली गईं। नेहा अंदर से पूरी तरह टूट चुकी थी। उसी शाम वह उस अफ़सर के पास पहुँची, जिससे वह डरती थी। उसने कहा कि अब वह इस रिश्ते में नहीं रह सकती। चाहे वह वीडियो वायरल कर दे या उसकी जान ले ले, वह अब और नहीं झेलेगी। वह अफ़सर हँसा। उसे कोई फर्क नहीं पड़ा। नेहा वहाँ से भाग निकली। डर, शर्म और पछतावे से उसका दम घुट रहा था। सीधे वह रवि के घर पहुँची। काँपते हाथों से उसने दरवाज़ा खटखटाया। जब दरवाज़ा खुला, तो सामने रवि खड़ा था। वह ठिठक गई। उसकी आँखों में उम्मीद थी, लेकिन रवि की आँखों में अब कोई रिश्ता नहीं था। उसने कहा कि वह उसकी पत्नी है और यह उनका बच्चा है। रवि ने ठंडी आवाज़ में कहा कि वह अब उसकी पत्नी नहीं है। तलाक़ हो चुका है। बच्चा अब उसके साथ रहेगा। और अगर वह दोबारा यहाँ आई, तो वह कानूनी रास्ता अपनाएगा। यह सुनकर नेहा फूट-फूटकर रो पड़ी। लेकिन दरवाज़ा बंद हो चुका था। उसके लिए अब लौटने का कोई रास्ता नहीं बचा था। उसी रात एक और झटका उसका इंतज़ार कर रहा था। जिस वीडियो से उसे डराया जा रहा था, वही वीडियो वायरल हो चुका था। उसकी नौकरी चली गई। वर्दी, रुतबा—सब एक पल में खत्म हो गया। नेहा पूरी तरह अकेली पड़ चुकी थी। और अभी कहानी खत्म नहीं हुई थी।
