Manish Kumar

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@Manish Kumar
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घर की घंटी हमेशा की तरह शांत थी... पर आज कुछ तो बदला हुआ था। हर रोज़ की तरह लड़के ने जैसे ही चाबी दरवाज़े में डाली — उसका दिल धक से रह गया। चाबी का छेद उल्टा था। वो वही चाबी नहीं थी जो वो रोज़ इस्तेमाल करता था। उसे याद आया — उसकी असली चाबी तो पुलिस स्टेशन में रखी है। तभी उसे समझ में आ गया — "घर में कोई है... और वो पुलिस है नहीं।"

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