तुम्हें जो मिला है, वो किस्मत नहीं है, तुम्हारे फैसलों का नतीजा है। हर सुबह जब अलार्म बजता है, तेरे पास दो रास्ते होते हैं—या तो फिर से सो जाना, या उस जिंदगी के पीछे भागना जो सिर्फ सपने में आती है। तू कहता है मैं किस्मत वाला नहीं हूं, मैं कहता हूँ तू मेहनत वाला नहीं है। किस्मत कोई जादू नहीं, वो एक आदत है—रोज उठने की, रोज कुछ सीखने की, रोज थोड़ा और आगे बढ़ने की। अगर तुम्हें अपनी कहानी बदलनी है, तो सबसे पहले कलम उठाओ और लिखो—'अब से मैं अपनी तकदीर खुद बनाऊंगा।' रुकावटें आएंगी हजार बार, लोग हसेंगे, रोकेंगे और कहेंगे—क्यों इतनी कोशिश कर रहा है? पर याद रख, जो खुद पर यकीन रखता है, वो अपनी किस्मत खुद लिखता है। और जब तु जीतेगा, दुनिया कहेगी इसकी किस्मत चमक गई... तब मुस्कुराना और कहना—'नहीं दोस्त, ये किस्मत मैंने खुद बनाई है।'"