ये जिंदगी क्यों रुकती है वहीं जहां जलने की लगी है मेरी क्या खता है मेरी क्या कमी मेरी क्या गलती मैं टूटा हूं अभी क्या जीतूंगा कभी ये पलकें भी आ भीगी अभी मैं रोता था नहीं अब रो लेता कभी जब टूटे मेरा दिल सब तोड़े मेरी रूह मेरे दिल में थी नमी ये पैसे भी पैसों की माया भी इज्जत से है जुड़ी सब पूछे हैं उसे जिसके पास है महंगी घड़ी पर देगा ना वो वक्त जो देता है अपना वक्त इज्जत देना गरीब और अपने भी सब है ये मतलबी देंगे इज्जत तभी जब जेबे हैं भरी वरना तेरी गलती गिनाएंगे सभी चाहे होगी ही नहीं फिर भी गलती तेरी बदले सभी सब हाजिर हो तभी तब झूठे हैं सभी करते चमचा गिरी तब मानेंगे सभी चाहे गलती हो तेरी पुकारेंगे सभी ये बंदिशें क्या टूटेंग कभी है तू मेरा तेरा नहीं मैं हूं तेरा तू मेरी रही तू मेरी थी कभी मैं तेरा मेरा खुदा ना करता कमी ना देता वहां जो देंगे नहीं ये चल पड़े उस डोर में जो बांधे नहीं कटती नहीं ये लोग भी सब मतलबी नोचते खाते वही सब दूरियां बन गई मेरा ज है जिंदगी
