🌸 राधा रानी का मान और श्रीकृष्ण की लीला 🌸 एक बार की बात है, वृंदावन में राधा रानी मान कर गईं। मान यानी प्रेम में रूठना — यह साधारण रूठना नहीं, बल्कि प्रेम की गहराई का प्रतीक होता है। श्रीकृष्ण ने बहुत प्रयास किया— कभी मधुर बांसुरी बजाई, कभी सखियों से संदेश भिजवाया, पर राधा रानी नहीं मानीं। तब श्रीकृष्ण ने एक बालक का रूप धारण किया और यमुना तट पर रोते हुए बैठ गए। राधा रानी ने जब उस बालक को रोते देखा, तो उनका हृदय पिघल गया। उन्होंने पास जाकर पूछा — “क्यों रो रहे हो?” बालक रूप में श्रीकृष्ण बोले — “राधा रानी रूठ गई हैं, इसलिए मेरा मन दुखी है।” यह सुनते ही राधा रानी समझ गईं कि यह लीला स्वयं कृष्ण की है। उनकी आँखों से प्रेम के आँसू बहने लगे और मान टूट गया। तभी श्रीकृष्ण प्रकट होकर बोले — “हे राधे! तुम्हारा मान ही मेरी सबसे बड़ी शक्ति है।” 🌼 कहानी का भावार्थ 🌼 राधा रानी केवल कृष्ण की प्रेमिका नहीं, बल्कि भक्ति की परम सीमा हैं। जहाँ प्रेम में अहंकार नहीं, वहाँ मान भी भक्ति बन जाता है। राधा के बिना कृष्ण अधूरे हैं और कृष्ण के बिना राधा।
