बेटा… तुम कहते हो — “पढ़ाई में मन नहीं लगता…” पर एक बात सच-सच बताओ… मन कभी लगा करता था, है ना? फिर आज ऐसा क्या हो गया कि वही किताब… वही कॉपी… अब बोझ लगने लगी? बेटा, मन कभी काम से नहीं भागता मन भागता है डर से… डर — कि अगर फेल हो गए तो क्या होगा? डर — कि मेहनत की और परिणाम नहीं आया तो? डर — कि सब आगे निकल गए और हम पीछे रह गए तो? यही डर… मन को पढ़ाई से दूर ले जाता है। देखो बेटा, मन को मत समझाओ… कर्तव्य को समझाओ। मन कहता है — “आज मत पढ़ो, कल पढ़ लेंगे।” कर्तव्य कहता है — “आज नहीं पढ़े, तो कल पछताओगे।” और जीवन में जो आज टालता है… वही कल रोता है। बेटा, पढ़ाई कोई सज़ा नहीं है। ये तो ईश्वर का दिया हुआ अवसर है। कितने बच्चे ऐसे हैं जिनके पास किताब खरीदने के पैसे नहीं… स्कूल जाने की सुविधा नहीं… और तुम… सब कुछ पाकर भी मन न लगने का रोना रो रहे हो। क्या यह अन्याय नहीं है? सुनो बेटा… भगवान परिणाम नहीं देखते, भगवान प्रयास देखते हैं। तुम्हारा काम है — ईमानदारी से पढ़ना। रोज़ थोड़ा-थोड़ा आगे बढ़ना। फल कब मिलेगा — ये तुम्हारा काम नहीं। ये ऊपर वाले का काम है। अगर मन नहीं लगता तो ये मत कहो — “आज मन नहीं है।” बल्कि ये कहो — “आज मन नहीं है, इसीलिए आज पढ़ूंगा।” क्योंकि जो मन के गुलाम होते हैं, वो कभी महान नहीं बनते। बेटा, सिर्फ 30 मिनट… पूरे मन से पढ़ो। फोन दूर रखो। सोशल मीडिया छोड़ो। और खुद से एक वादा करो — “आज मैं अपने भविष्य के लिए कम से कम इतना समय दूँगा।” यही 30 मिनट… कल 1 घंटा बनेंगे… फिर 3 घंटे… और एक दिन तुम्हारी पहचान बनेंगे। याद रखना बेटा… आज की तकलीफ कल की ताकत है। और जो आज खुद से लड़ गया… वही कल दुनिया जीत गया। (अंत में शांत स्वर) ईश्वर तुम्हारे साथ हैं। बस तुम हार मत मानना। पढ़ो… क्योंकि तुम्हारा भविष्य तुम्हारी राह देख रहा है। 🙏
