[संगीत] जाना तो आता नहीं सपनों से जाता नहीं मिल जाए क्या ही बात थी कामिल हो जाता वहीं जाना मेरे सवालों का मंजर तू हां मैं सूखा सा सारा समंदर तू हां गुलाबी सी सुर्खी जो दिखती थी फिर से दिख ज तोत जी भर के सा भर लो काटी कितनी थी रातें नहीं सोया मैं तुझको कितना बुलाया फिर रोया मैं तेरी सारी वो बातें क्यों सोने नहीं देती सताए मुझे हा फिर खोया मैं तू आता नहीं सपनों से जाता नहीं मिल जाए क्या ही बात थी कामिल हो जाता वही जो भी हो रास तेरा मुझको बताता नहीं मिल जाए क्या ही बात थी कामिल हो जाता वही [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] संभाल के रखा वो फूल मेरा तू मेरी शायरी में जरूर रहा तू जो आंखों में प्यारी सी दुनिया बसाई वो दुनिया भी था तू वो लम्हा भी था तू हां लगते हैं मुझको ये किस्से सताने देता ना दिल मेरा तुझको भुलाने अधूरे से वादे अधूरी सी रातें अब हिस्से में दाखिल मेरी बस वो यादें रहना था बनके हमदम तेरा ऐसे जाना ही था फिर तू क्यों ठहरा अब ना माने मेरा दिल कि ना तेरे काबिल थ आरजू की मैं कहता रहा पर तू आता नहीं सपनों से जा नहीं मिल जाए क्या ही बात थी कामिल हो जाता वही जो भी हो राज तेरा मुझको बताता नहीं मिल जाए क्या ही बात थी कामिल हो जाता वही
