गाँव के एक छोटे से खेत में... रहती थीं सत्तर साल की दादी — दिल से जवान। उनका साथी था खेत का शेर... ताक़तवर, वफ़ादार बैल — मोती। दादी और मोती रोज़ खेत जोतते... मिट्टी की खुशबू ही उनकी ज़िंदगी थी। एक दिन हल... ज़मीन में किसी सख़्त चीज़ से टकराया। दादी ने खोदा... तो निकला पुराना लोहे का डिब्बा। डिब्बा खुला... और अंदर था — ढेर सारा सोना! खुश होकर... दादी ने डिब्बा सिर पर रखा... और सुनसान रास्ते से घर की ओर चल पड़ीं। लेकिन... झाड़ियों में छिपे थे दो चोर। घात लगाए बैठे। बीच रास्ते में... उन्होंने डिब्बा छीनने की कोशिश की। दादी को धक्का देकर गिरा दिया। तभी खेत में घास खा रहा मोती... दादी की चीख़ सुनते ही — बिजली की तरह दौड़ा! पहले चोर को सींग से हवा में उछाला... दूसरे को ज़मीन पर पटक दिया। दोनों डरकर भाग निकले। दादी ने मोती को गले लगाया... "मोती बेटा... तू तो मेरे लिए भगवान है।" मोती ने मासूम आँखों से देखा... "भगवान खुश होंगे अगर... आप लाइक और सब्सक्राइब कर दो।"
