वह खुद को रब कहता था। वह खुदा होने का दावा करता था। उसके महल सोने से चमकते थे। उसके कदमों तले हज़ारों ग़ुलाम थे। और फिर… एक दिन… समंदर उसके सामने खड़ा हो गया। क्या हुआ कि वही फ़िरौन, जो खुद को धरती का सबसे बड़ा बादशाह समझता था, कुछ ही लम्हों में इतिहास का सबसे इबरतनाक अंजाम बन गया? अल्लाह ने फ़िरौन को कैसे तबाह किया? और क्यों? परिचय (INTRODUCTION) प्राचीन मिस्र की धरती पर एक ऐसा दौर गुज़रा है जिसे ताक़त, घमंड और ज़ुल्म की चरम सीमा कहा जा सकता है। उस दौर का सबसे बड़ा किरदार था फ़िरौन — एक ऐसा बादशाह जो न सिर्फ़ अपनी बादशाहत पर घमंड करता था बल्कि खुदा होने का दावा भी करता था। क़ुरआन करीम में अल्लाह तआला ने कई जगहों पर फ़िरौन और उसकी क़ौम का ज़िक्र किया है। सूरह अल-क़सस, सूरह ताहा, सूरह अल-आराफ़ और सूरह अश-शुअरा में यह वाक़िया विस्तार से बयान हुआ है ताकि आने वाली नस्लें इससे इबरत हासिल करें। यह कहानी सिर्फ़ एक बादशाह की मौत नहीं है… यह घमंड, ज़ुल्म, हक़ का इनकार और सरकशी के अंजाम की पूरी तस्वीर है। मुख्य कहानी (MAIN STORY) फ़िरौन का घमंड और खुदाई का दावा फ़िरौन मिस्र का बेताज बादशाह था। उसके महल, उसकी फ़ौज, उसकी दौलत और उसकी ताक़त — सब कुछ बेमिसाल था। क़ुरआन करीम में सूरह अन-नाज़िआत में उसके ये अल्फ़ाज़ नक़्ल किए गए हैं: "मैं तुम्हारा सबसे बड़ा रब हूँ।" यह वही लम्हा था जब फ़िरौन ने सारी हदें पार कर दीं। वह खुद को खुदा कहने लगा। उसने बनी इसराईल को ग़ुलाम बना रखा था। उन पर बेहद ज़ालिमाना ज़ुल्म किए जाते थे। उनके बेटों को क़त्ल कर दिया जाता और औरतों को ज़िंदा छोड़ दिया जाता ताकि वे ज़िल्लत की ज़िंदगी गुज़ारें। क़ुरआन करीम सूरह अल-क़सस में इन ज़ुल्मों का विस्तार से ज़िक्र करता है। हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की पैग़म्बरी इसी ज़ुल्म के दौर में अल्लाह तआला ने हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम को नबूवत अता फ़रमाई। सूरह ताहा में वह महान संवाद बयान हुआ है जब कोहे तूर पर अल्लाह ने हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम को आदेश दिया: "फ़िरौन के पास जाओ, वह सरकश हो चुका है।" हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम अल्लाह का पैग़ाम लेकर फ़िरौन के दरबार में पहुँचे और कहा: "ऐ फ़िरौन! बनी इसराईल को आज़ाद कर दे और अल्लाह एक पर ईमान ले आ।" लेकिन फ़िरौन ने इनकार कर दिया। घमंड किया। हक़ को झुठला दिया। चमत्कारों का प्रकट होना और फ़िरौन का इनकार अल्लाह तआला ने हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम को बड़े-बड़े चमत्कार दिए। सूरह अल-आराफ़ में बताया गया है कि जब उन्होंने अपना عصा ज़मीन पर डाला तो वह एक विशाल अजगर बन गया और जब उन्होंने हाथ निकाला तो वह सूरज की तरह चमक उठा। फ़िरौन ने इन चमत्कारों को जादू कहकर ठुकरा दिया। उसने मिस्र के बड़े-बड़े जादूगरों को बुलाया। लेकिन जब हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम का चमत्कार सामने आया तो जादूगर सजदे में गिर गए और बोले: "हम मूसा और हारून के रब पर ईमान ले आए।" यह फ़िरौन के घमंड पर करारी चोट थी। उसने जादूगरों के हाथ-पैर कटवा दिए और उन्हें सूली पर चढ़ा दिया, मगर हक़ की रोशनी फैल चुकी थी। अज़ाबों की चेतावनी फ़िरौन की लगातार सरकशी पर अल्लाह तआला ने उसकी क़ौम पर एक के बाद एक अज़ाब भेजे: तूफ़ानी बारिश टिड्डियों का हमला जुएँ मेंढक खून ये सभी अल्लाह की तरफ़ से चेतावनी थीं। हर बार फ़िरौन वादा करता कि अगर अज़ाब हट गया तो वह ईमान ले आएगा, लेकिन जैसे ही अज़ाब टलता, वह फिर इनकार कर देता। आख़िरी फ़ैसला — हिजरत का हुक्म आख़िरकार अल्लाह तआला ने हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम को आदेश दिया कि बनी इसराईल को रातों-रात मिस्र से निकाल ले जाओ। यह घटना सूरह अश-शुअरा में विस्तार से बयान की गई है। रात की अंधेरी चादर में हज़ारों मज़लूम ग़ुलाम अपनी उम्मीदों की रौशनी लेकर निकल पड़े। उनके पीछे फ़िरौन की विशाल फ़ौज थी — घोड़े, रथ, हथियार और हज़ारों सैनिक। सामने था समंदर। पीछे थी मौत। समंदर का फटना — इतिहास का सबसे बड़ा चमत्कार बनी इसराईल घबरा गए। हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया: "हरगिज़ नहीं! मेरा रब मेरे साथ है, वह मुझे रास्ता दिखाएगा।" अल्लाह के हुक्म से उन्होंने अपना عصा समंदर पर मारा और समंदर दो हिस्सों में बंट गया। बीच में सूखा रास्ता बन गया और पानी पहाड़ों की तरह दोनों ओर खड़ा हो गया। बनी इसराईल सुरक्षित उस रास्ते से गुज़र गए। फ़िरौन का अंजाम — घमंड का अंत फ़िरौन ने पीछा किया। जैसे ही उसकी फ़ौज समंदर के बीच पहुँची, अल्लाह का हुक्म आया। पानी आपस में मिल गया। ज़ोरदार लहरें उठीं। फ़िरौन, उसकी फ़ौज, उसके घोड़े और उसकी ताक़त — सब कुछ कुछ ही लम्हों में समंदर की गहराइयों में दफ़्न हो गया। डूबते समय फ़िरौन बोला: "मैं ईमान लाया कि कोई माबूद नहीं सिवाय उसके जिस पर बनी इसराईल ईमान लाए।" लेकिन जवाब मिला: "अब? जबकि पहले नाफ़रमानी करता रहा?" उसकी तौबा क़बूल न हुई। लाश को सुरक्षित रखने का फ़ैसला अल्लाह तआला ने फ़रमाया: "आज हम तेरे जिस्म को बचा लेंगे ताकि तू आने वालों के लिए निशानी बन जाए।" यही फ़िरौन है जिसकी लाश आज भी दुनिया के संग्रहालयों में मौजूद है — एक ज़िंदा इबरत, एक ख़ामोश गवाही। क्लाइमेक्स (CLIMAX) सोचिए… वह इंसान जो खुदा होने का दावा करता था… जिसके इशारे पर ज़िंदगियाँ ख़त्म हो जाती थीं… जिसके सामने हज़ारों सिर झुकते थे… आज खुद बेबस था। मौत के मुहाने पर था। समंदर की अंधेरियों में चीख़ रहा था। लेकिन अब वक्त खत्म हो चुका था। यही था घमंड का अंजाम। यही थी सरकशी की सज़ा। यही था अल्लाह की क़ुदरत का प्रदर्शन। निष्कर्ष और नैतिक शिक्षा (CONCLUSION & MORAL LESSON) फ़िरौन की कहानी हमें सिखाती है कि: ताक़त हमेशा नहीं रहती। दौलत हमेशा नहीं रहती। बादशाहत हमेशा नहीं रहती। लेकिन अल्लाह की पकड़ हमेशा सच्ची होती है। क़ुरआन हमें चेतावनी देता है कि ज़ुल्म, घमंड और हक़ का इनकार इंसान को आख़िरकार तबाही की तरफ़ ले जाता है। आज के दौर में शायद कोई खुद को खुदा न कहे, मगर घमंड, अहंकार, ज़ुल्म और नाइंसाफ़ी — ये सब फ़िरौनियत की आधुनिक शक्लें हैं। यह कहानी हमें दावत देती है कि: हम विनम्रता अपनाएँ। अल्लाह के सामने झुक जाएँ। मज़लूम का साथ दें। और हक़ के रास्ते पर डटे रहें। क्योंकि जो फ़िरौन को समंदर में डुबो सकता है… वह हर ज़ालिम को उसके अंजाम तक पहुँचाने पर पूरी तरह सक्षम है। यही है फ़िरौन की तबाही की असली कहानी। यही है क़ुरआन का ज़िंदा सबक़।
