प्रिय साधकजनों, मानव जीवन का हर क्षण अनमोल है। यह जीवन केवल भोग और विषय-वासनाओं के लिए नहीं मिला है, बल्कि आत्मोन्नति और परम शांति की प्राप्ति के लिए मिला है। इसी मार्ग पर चलने में जो सबसे बड़ी शक्ति है—वह है ब्रह्मचर्य। --- 1. ब्रह्मचर्य का वास्तविक अर्थ ब्रह्मचर्य का अर्थ केवल इंद्रिय-निग्रह नहीं है। ब्रह्मचर्य का अर्थ है—अपने मन, बुद्धि और भावनाओं को ब्रह्म की ओर, सत्य की ओर, आत्मा की ओर ले जाना। जब मन ऊँचा होता है, तो जीवन भी ऊँचा होता है। --- 2. ऊर्जा का संरक्षण साधकों, हमारी जीवन-ऊर्जा बहुमूल्य है। जब यह ऊर्जा विषय-वासनाओं में व्यर्थ होती है, तो मन अशांत हो जाता है, लक्ष्य धूमिल हो जाता है। लेकिन जब यही ऊर्जा ध्यान, जप, सेवा, अध्ययन और साधना में लगती है, तो वही ऊर्जा दिव्य बन जाती है। --- 3. मन का नियंत्रण ब्रह्मचर्य का मूल आधार है—मन पर विजय। जो मन को जीत लेता है, संसार में उसे कोई नहीं हरा सकता। वासनाएँ बाहर से नहीं आतीं; वे मन के भीतर के संस्कारों से उठती हैं। जब साधक विवेक रखता है, संगति शुद्ध रखता है, भोजन सात्त्विक रखता है—तो मन स्वतः शांत होने लगता है। --- 4. संगति का प्रभाव सत्संग, शास्त्र-संग और सज्जनों का संग मन को ऊपर उठाता है। बुरी संगति मन को नीचे गिराती है। ब्रह्मचर्य का पालन करने वाला साधक सबसे पहले अपनी संगति को शुद्ध करता है। --- 5. ब्रह्मचर्य का फल ब्रह्मचर्य केवल रोकना नहीं, बल्कि रूपांतरित करना है। जिसके जीवन में ब्रह्मचर्य आता है— उसके चेहरे पर तेज आता है, बोल में मिठास आती है, विचारों में स्थिरता आती है, और हृदय में करुणा व शांति उतरती है। --- 6. अभ्यास ही शक्ति है ब्रह्मचर्य एक दिन का निर्णय नहीं—यह निरंतर साधना है। जब साधक गिरता है, तो निराश नहीं होता। वह फिर से उठता है, फिर से प्रयास करता है, और हर दिन स्वयं को बेहतर बनाता है। --- (समापन) साधकों, ब्रह्मचर्य का मार्ग कठिन अवश्य है, पर असंभव नहीं है। जो ईश्वर को प्रेम करता है, जो आत्मा की शांति चाहता है— उसके लिए यह मार्ग आनंदमय हो जाता है। ईश्वर आप सभी को मन-निग्रह, विवेक और दृढ़ता प्रदान करें। आपके जीवन में शांति, पवित्रता और उजाला बढ़ता रहे। --- यदि चाहें, मैं इसका: ✔ छोटा संस्करण ✔ 1 मिनट /
