Mukesh

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@Rohit Kawde
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भूतिया घर और आलसी भूत एक अंधेरी रात थी। चार दोस्त—आर्यन, रोहन, सिया और दीक्षा—अपने जीवन के सबसे खतरनाक रोमांच का सामना करने के लिए एक पुराने खंडहर की ओर बढ़ रहे थे। यह खंडहर कभी एक भव्य हवेली थी, लेकिन अब इसके टूटे-फूटे दरवाजे और उखड़ी हुई दीवारें इसे एक डरावनी जगह बना रहे थे। पूरे मोहल्ले में कहा जाता था कि इस हवेली में भूत रहते हैं, लेकिन इन चारों को यह सब सिर्फ अफवाहें लगती थीं। उन्हें डर तो लग रहा था, लेकिन रोमांच भी महसूस हो रहा था। "यार, ये तो कुछ ज्यादा ही डरावना लग रहा है..." दीक्षा ने धीरे से कहा, उसकी आवाज़ में हल्की घबराहट थी, लेकिन फिर भी उसने हिम्मत जुटाई और आगे बढ़ी। "अरे, डरो मत! ये बस एक पुराना खंडहर है," रोहन ने ज़ोर से हंसते हुए कहा, "सिर्फ कुछ मकड़ी के जाले, टूटी-फूटी पेंटिंग्स और..." वह अचानक रुक गया और गले को साफ किया, "...और... और

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