"अस्सलाम वालेकुम व रहमतुल्लाही व बरकातहू। तमाम आलम-ए-इस्लाम को रमज़ानुल मुबारक की बहुत-बहुत मुबारकबाद। दोस्तों, साल के 11 महीने हम अपनी दुनियादारी में मशरूफ रहते हैं, लेकिन ये एक महीना अल्लाह ताला ने हमें खुद को बदलने के लिए दिया है। आज के इस वीडियो में हम जानेंगे कि इस रमज़ान हम अपनी ज़िंदगी में तब्दीली कैसे लाएं।""हबीब-ए-पाक ﷺ ने फ़रमाया कि रमज़ान का पहला हिस्सा रहमत, दूसरा मग़फिरत और तीसरा जहन्नुम से आज़ादी का है। सिर्फ भूखा रहना रोज़ा नहीं: याद रखें, रोज़ा सिर्फ पेट का नहीं होता, बल्कि हमारी आँखों का, ज़ुबान का और हमारे अख़्लाक़ (व्यवहार) का भी होता है। नेकियों का सीज़न: इस महीने में एक नफ़्ल का सवाब फ़र्ज़ के बराबर और एक फ़र्ज़ का सवाब 70 गुना बढ़ा दिया जाता है। तो क्यों न हम इस मौके का पूरा फायदा उठाएं?""मेरे भाइयों और बहनों, अगर आपके वीडियो पर व्यूज़ कम आ रहे हैं या ज़िंदगी में मुश्किलें हैं, तो इस रमज़ान में 'दुआ' का सहारा लें। तहज्जुद और इफ़्तार के वक्त की दुआ कभी रद्द नहीं होती।"