और आज हम बात करेंगे मध्य पूर्व के उस ज्वलंत मुद्दे पर, जिसने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है – इज़रायल-ईरान संघर्ष। बीते कुछ हफ़्तों से इज़रायल और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर रहा है। 12 दिनों तक चले भीषण सैन्य संघर्ष के बाद, जहाँ इज़रायल ने ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, वहीं ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इज़रायली ठिकानों पर हमले किए। इस युद्ध ने एक बार फिर मध्य पूर्व की अस्थिरता को उजागर किया है और वैश्विक भू-राजनीति पर इसके गहरे प्रभाव पड़ने लगे हैं। आइए, सबसे पहले आपको दिखाते हैं इस पूरे घटनाक्रम की मुख्य बातें: * इज़रायली हमले: इज़रायल ने 13 जून को ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए, जिसमें उसके F-35I 'अदीर' स्टील्थ फाइटर जेट्स का इस्तेमाल किया गया। इन हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु ठिकानों और सैन्य बुनियादी ढांचे को नष्ट करना था। * ईरान का जवाब: ईरान ने भी इज़रायल पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से जवाबी हमले किए, जिसमें हाइफ़ा और वीज़मैन इंस्टीट्यूट जैसे इज़रायली ठिकानों को निशाना बनाया गया। ईरान ने अपनी प्रतिरोधक क्षमता का प्रदर्शन करते हुए इज़रायल को संदेश दिया कि वह किसी भी हमले का जवाब देने में सक्षम है।
