एक गाँव में एक गरीब लड़का रहता था — नाम था अर्जुन। उसके पास न अच्छे कपड़े थे, न किताबें, और न ही पढ़ाई का सही साधन। लेकिन उसके अंदर था एक सपना — "कुछ बड़ा करना है!" हर दिन वह गाँव के स्कूल में नंगे पाँव जाता, दूसरों की पुरानी किताबों से पढ़ता और रात में दीपक की रोशनी में पढ़ाई करता। गाँव वाले कहते, “इतनी मेहनत कर के क्या करेगा? तुम्हारा भाग्य तो पहले से लिखा है।” लेकिन अर्जुन मुस्कुराता और कहता, “मैं ही अपनी किस्मत लिखूँगा।”
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