“एक सपना… जो लाखों बच्चों ने दिन-रात जागकर देखा। एक परीक्षा… जिसके लिए किसी ने अपना बचपन कुर्बान किया… तो किसी माँ-बाप ने अपनी पूरी जमा पूंजी। लेकिन सोचिए… अगर परीक्षा शुरू होने से पहले ही उसका पेपर बिक जाए तो? क्या मेहनत अब सिर्फ अमीरों और जुगाड़ वालों के सामने हार रही है? और सबसे बड़ा सवाल… क्या भारत का एजुकेशन सिस्टम अब भरोसे के लायक बचा है?”