शिव जी ने कभी महलों की इच्छा नहीं की। श्मशान में भी शांत रहे, और कैलाश पर भी सरल रहे। इसका अर्थ है— सुख और दुःख, दोनों स्थायी नहीं हैं। जो व्यक्ति परिस्थितियों से ऊपर उठकर अपने मन को स्थिर रखता है, उसी पर भगवान शिव की कृपा बनी रहती है। दुनिया बदलने से पहले, अपने विचार बदलो। "जिसने मन जीत लिया, उसने संसार जीत लिया।" ॐ नमः शिवाय।