एक दिन फुरफुरी नगर की गली में मोटू और पतलू घूम रहे थे। अचानक मोटू की नाक में समोसे की खुशबू आई। मोटू बोला – “पतलू! समोसे की खुशबू आ रही है… चलो देखते हैं।” दोनों दौड़ते-दौड़ते पहुंचे और देखा कि सड़क के किनारे एक रहस्यमयी समोसा वाला बैठा है। उसके ठेले पर लिखा था – “एक समोसा, सौ गुणा ताकत।” मोटू की आंखें चमक उठीं। उसने झट से एक समोसा खा लिया। जैसे ही उसने खाया, मोटू के अंदर अजीब-सी ताकत आ गई। वह हवा में ऊँची छलांग मारने लगा, पेड़ उखाड़ने लगा और ज़मीन पर पैर मारते ही धूल के गुबार उड़ने लगे। पतलू हैरान रह गया और बोला – “अरे मोटू! तू तो सुपरहीरो बन गया है।” उसी समय जॉन और उसका गिरोह वहाँ आ गए। उन्होंने सोचा – “अब तो मज़ा आ जाएगा, मोटू-पतलू को पकड़ लेते हैं।” लेकिन जैसे ही उन्होंने मोटू पर हमला किया, मोटू ने एक ही “पंच” में उन्हें दूर फेंक दिया। फिर पतलू ने समझदारी दिखाते हुए मोटू को कहा – “मोटू, ये ताकत हमेशा के लिए नहीं है। सही काम में इसका इस्तेमाल करो।” मोटू ने अपनी ताकत से शहर के टूटे पुल की मरम्मत की, सबकी मदद की और बच्चों को झूले पर घुमाया। पूरा फुरफुरी नगर खुशी से झूम उठा। आखिरकार जब समोसे का असर ख़त्म हो गया, मोटू बोला – “यार पतलू, ताकत तो गई… लेकिन समोसे का स्वाद हमेशा रहेगा।” पतलू हँसते हुए बोला – “मोटू, तू बिना ताकत के भी सबका हीरो है!” और दोनों ठहाके लगाते हुए घर की ओर चल पड़े।
