एक लड़का था, एक लड़की थी, स्कूल की गलियों में उनकी कहानी थी। नज़रों से शुरू हुआ वो प्यार, हर धड़कन में बसता था एक ख़ास इज़हार। लड़की बोली, "कभी छोड़कर नहीं जाऊंगी," "तेरे बिना एक पल भी नहीं जी पाऊंगी।" पर किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था, शहर भेज दिया उसे, ये वक़्त का दस्तूर था। धीरे-धीरे बातें कम होने लगीं, उसकी यादें अब खामोशियां बनने लगीं। लड़का फिर भी मुस्कराता रहा, हर दर्द को सीने में दबाता रहा। फिर एक दिन आया वो ज़ख्म वाला पल, जिसने उसकी सारी दुनिया ही बदल डाली कल। मां-बाप ने उसकी शादी कर दी कहीं और, और लड़की ने भी सिर झुका दिया उस ओर। जिसने कहा था "मैं तेरी रहूंगी सदा," आज किसी और की बन गई बिना वफ़ा। ना शिकवा किया, ना कोई सवाल रखा, बस टूटा दिल और खामोशियों का हल्का धुआं रखा। अब सिर्फ यादें हैं, वो स्कूल वाला प्यार, जो अधूरा रह गया... सिर्फ़ तन्हा इंतज़ार।
