एक हरे-भरे जंगल में गज्जू नाम का एक बड़ा हाथी रहता था। गज्जू बहुत ताकतवर था, लेकिन कभी-कभी उसे अपने बल पर घमंड हो जाता था। उसी जंगल में एक छोटी, मेहनती चींटी भी रहती थी। वह छोटी थी, पर मेहनती और समझदार थी। एक दिन गज्जू ने चींटी को देखा और बोला – "अरे चींटी! तू कितनी छोटी है। तेरे जैसा नन्हा जीव क्या कर सकता है?" चींटी मुस्कुराई और बोली – "गज्जू भाई, आकार से ज़्यादा मेहनत और समझदारी मायने रखती है।" कुछ दिनों बाद गज्जू जंगल में घूम रहा था। अचानक वह शिकारी के जाल में फँस गया। गज्जू ने बहुत कोशिश की, लेकिन जाल नहीं टूटा। वह घबराकर ज़ोर से चिल्लाने लगा। गज्जू की आवाज़ सुनकर चींटी आई। उसने अपने दोस्तों को बुलाया। ढेर सारी चींटियाँ आईं और धीरे-धीरे जाल को काटना शुरू कर दिया। थोड़ी देर में गज्जू आज़ाद हो गया। "आज मुझे समझ आया कि चाहे कोई बड़ा हो या छोटा, सबकी अपनी अहमियत होती है।" चींटी ने कहा – "हाँ गज्जू भाई, मिलकर काम करने से बड़ी से बड़ी मुसीबत हल हो सकती है।"
