सबसे पहले, बैकग्राउंड: गंभीर भाई को तो जुलाई 2024 में ही हेड कोच बना दिया गया था। तीन साल का कॉन्ट्रैक्ट, यानी 2027 वर्ल्ड कप तक 'फिक्स्ड डिपॉजिट' जैसा। लेकिन अरे वाह, साउथ अफ्रीका के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज में 0-2 की धुनाई! और उससे पहले न्यूजीलैंड ने भी 0-3 से साफ कर दिया। घर में दो क्लीन स्वीप्स? ये तो वैसा ही है जैसे दिल्ली में रहकर AC के बिना गर्मी झेलना – बर्दाश्त से बाहर! पिच कंडीशंस पर सवाल, प्लेइंग इलेवन का चयन गड़बड़, बैटिंग ऑर्डर में उल्टा-पुल्टा खेल। क्रिकेट सर्कल में चाय की दुकानों से लेकर एक्सपर्ट पैनल तक, सब यही बहस: "गंभीर को हटाओ!" एक तो घरेलू मैदान पर हार, वो भी दो बार – ये तो IPL फाइनल हारने से भी बुरा! अब फनी ट्विस्ट: कल्पना करो, गंभीर स्टैंड पर खड़े होकर चिल्ला रहे हैं, "ये पिचें तो मेरी तरह सख्त हैं, लेकिन बैट्समैन सॉफ्ट हो गए!" हाहाहा! लेकिन सीरियसली बोलें, बीसीसीआई के एक सोर्स ने ANI को लीक किया – "वो तीनों फॉर्मेट्स में हेड कोच बने रहेंगे। अभी कोई डिसीजन नहीं लिया गया।" यानी, सैकिंग की अफवाहें तो हैं, लेकिन अभी 'ओनली फेक न्यूज' स्टेटस। तीन साल का टर्म तो पक्का, 2027 तक। सोचो, गंभीर ने कहा होगा, "मैं तो IPL जीतने वाले कोच हूं, टेस्ट में थोड़ा टाइम दो भाई!" अब अच्छी बातें गिनाओ: लिमिटेड ओवरस में तो गंभीर का जादू चल रहा! चैंपियंस ट्रॉफी जीती, एशिया कप पर कब्जा। T20 में प्लेयर्स 'फियरलेस' खेल रहे – जैसे गंभीर खुद 2007 T20 वर्ल्ड कप में खेलते थे। कॉन्फिडेंस का इंजेक्शन लगाया है, खिलाड़ी अब रिस्क लेते हैं बिना डरे। लेकिन टेस्ट? अरे, वो तो वैसा ही है जैसे शादी में दूल्हा लेट पहुंचे – सब कुछ सेट लेकिन टाइमिंग गड़बड़! एक्सपर्ट्स कहते हैं, टेस्ट को सुधारो तो सब ठीक। अगला मिशन: T20 वर्ल्ड कप। अगर वो जीत लिया, तो गंभीर 'हीरो'। हार गए, तो बीसीसीआई सोचेगी, "अरे, ये तो ओवररेटेड निकला!" फनी साइड: गंभीर का चेहरा तो हमेशा 'गंभीर' रहता है, लेकिन कोचिंग में हंसते कम दिखते! सोचो, अगर सैक हो गए तो क्या करेंगे? कमेंट्री में लौट आएंगे, "ये शॉट तो मेरा था!" या पॉलिटिक्स में? दिल्ली से MP बनकर संसद में 'स्लेजिंग' शुरू! हाहाहा! लेकिन सच ये है कि बीसीसीआई स्टेबल रहना चाहती है। घरेलू हार से सवाल उठे, लेकिन ओवरऑल रिकॉर्ड मिक्स्ड बैग। टेस्ट में प्रॉब्लम्स हैं, लेकिन वनडे-T20 में 'बॉस लेवल'।