यहां बहने वाली बसपा नदी का पानी इतना साफ है... जैसे किसी ने आसमान को पिघला कर ज़मीन पर बहा दिया हो। ठंडी हवा जब चेहरे को छूटती है ना... तो लगता है जैसे माँ ने प्यार से सर पर हाथ रखा हो। यहां ना शहर का शोर है... ना डेडलाइन का डर... बस पहाड़ों की खामोशी है... और दिल की आवाज़.
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