क्या एक वेश्यागामी, चोर और डकैत को मोक्ष मिल सकता है जिसने 88 साल तक केवल पाप किया हो? श्रीमद् भागवत पुराण की यह कहानी आपके रोंगटे खड़े कर देगी। यह सबूत है कि भगवान का नाम पापों की आग से भी ज्यादा शक्तिशाली है। कहानी है कन्नौज के एक ब्राह्मण अजामिल की, जो कभी वेदों का ज्ञाता था। लेकिन एक वेश्या के मोह में ऐसा फंसा कि अपना धर्म, अपनी पत्नी और अपने माता-पिता सबको त्याग दिया। उसने वह हर पाप किया जो एक इंसान कर सकता है—चोरी, डकैती और हत्या। पाप करते-करते अजामिल 88 साल का बूढ़ा हो गया। उसके 10 बेटे थे। संतों के कहने पर उसने अपने सबसे छोटे और लाडले बेटे का नाम रखा था 'नारायण'। अजामिल को भगवान से कोई मतलब नहीं था, उसकी जान तो बस अपने बेटे नारायण में बसती थी। वह सोते-जागते बस नारायण-नारायण रटता रहता अपने बेटे के लिए। फिर वह भयानक घड़ी आई। अजामिल अपनी खटिया पर आखिरी सांसे गिन रहा था। तभी उसे तीन खौफनाक यमदूत दिखाई दिए। उनके हाथ में पाश (रस्सी) थी और आंखें अंगारों जैसी लाल। वे अजामिल की आत्मा को घसीटने आगे बढ़े। अजामिल डर से कांप उठा, उसका गला सूख गया। घबराहट में उसे भगवान याद नहीं आए, उसे याद आया अपना छोटा बेटा जो आंगन में खेल रहा था। उसने पूरी ताकत लगाकर चिल्लाया— 'नारायण! बेटा नारायण मुझे बचाओ!'