“इंडिविजुअलाइज़ेशन की होड़” — यानी लोग पहले से ज़्यादा अपने-अपने अलग होने, अलग दिखने, और दूसरों से अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। समाज हमेशा से सामूहिक (collective) सोच पर चलता था, लेकिन पिछले कुछ दशकों में “मैं कौन हूँ?” और “मैं बाकी से अलग कैसे हूँ?” पर ज़ोर बहुत बढ़ गया है। मैं तुम्हें इस बदलाव की जड़ें समझाता हूँ: --- 1. 🌍 वैश्वीकरण और आर्थिक बदलाव पहले गाँव, जाति, या परिवार से पहचान तय होती थी। अब लोग शहरों और देशों में जाकर पढ़ते-कमाते हैं। जब हम पारंपरिक ढांचे से निकलते हैं, तो अपनी नई पहचान खुद गढ़ने की ज़रूरत महसूस होती है। --- 2. 📱 सोशल मीडिया का असर सोशल मीडिया हमें लगातार बताता है कि “अलग दिखो, वरना अनदेखे रह जाओगे।” हर कोई फोटो, वीडियो, स्टोरी में अपनी खासियत दिखाना चाहता है — यही इंडिविजुअल ब्रांडिंग है। इस वजह से लोग भीड़ में खोने के डर से ज़्यादा अनोखे दिखने की होड़ में रहते हैं।
