gana

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@Mehtab Jaffar
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[संगीत] साहिबा आए घर कहेना ऐसे तो सताए ना देखूं तुझको चैन आता है साहिबा नींदे वंदे आए ना रातें काटी जाए ना तेरा ही खयाल दि दिन रन आता है साहिबा समंदर मेरी आंखों में रह गए हम आते आते जाना तेरी यादों में रह गए ये बल्के गवाही है हम रातों में रह गए जो वादे किए सारे बस बातों में रह गए बातों बातों में ही ख्वाबों ख्वाबों में ही मेरे करीब है तू तेरी तलब मुझको तेरी तलब जाना हूं तू कभी रूबरू शोर शराबा जो सीने में है मेरे कैसे भया मैं करूं हार जो मेरा है मैं किसको बताऊं मेरे साहिबा दिल ना किराए का थोड़ा तो संभालो ना नाजुक है ये टूट जाता है साहेबा नींदे वंदे आए ना रातें काटी जाए ना तेरा ही खयाल दिन रहन आता है [संगीत] कैसे भला शब होगी वो संग जो तेरे ढलती है दिल को कोई ख्वाहिश नहीं तेरी कमी खलती है आराम ना अब आंखों को ख्वाब भी ना बदलती है दिल को कोई ख्वाहिश नहीं तेरी कमी जाना खलती है साहिबा तू ही मेरा आईना हाथों में भी मेरे हां तेरा ही नसीब आता है साहेबा नींदे विंदे आए ना रातें काटी जाए ना तेरा ही खयाल दिन रहना है साहेबा नींद भी आए ना रातें काटी जाए ना तेरा ही खयाल दिन रहना आता [संगीत] है

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