Rahul's Voice

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@Rahul Parihar
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रात के 2 बजे, सुनसान सड़क पर अंधेरा इतना गहरा था कि स्ट्रीट लाइट भी कांपती लग रही थी। आर्या घर लौट रही थी। चलते-चलते उसे अपने पीछे किसी के कदमों की आहट सुनाई दी—धीमी, खिंचती हुई… जैसे कोई घिसटता हुआ उसका पीछा कर रहा हो।

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