आकाश ने कांपते हाथों से डायरी खोली। पहले पन्ने पर तारीख लिखी थी — 13 जुलाई 1998 “आज हमने यह घर खरीदा है… लेकिन इस घर में कुछ है… जो हमें देख रहा है…” रिया ने डरते हुए पूछा, “भैया… इसमें क्या लिखा है?” आकाश पढ़ने लगा — “हर रात कोई हमारे कमरे के बाहर चलता है… कल मैंने अपनी बेटी को सीढ़ियों पर किसी से बात करते देखा… लेकिन वहाँ कोई नहीं था…” अचानक घर की सारी लाइट्स झपकने लगीं। रिया चिल्लाई — “भैया! ऊपर कोई फिर चल रहा है!” इस बार आवाज पहले से ज्यादा भारी थी। जैसे कोई घसीटते हुए चल रहा हो। आकाश ने डायरी का अगला पन्ना पलटा — वहाँ आखिरी लाइन लिखी थी: “अगर तुम यह पढ़ रहे हो… तो अगला नंबर तुम्हारा है…” और तभी… सीढ़ियों से धीरे-धीरे कोई उतरने लगा। ठक… ठक… ठक… सबकी सांसें रुक गईं। सीढ़ियों के मोड़ पर एक काली आकृति दिखाई दी — और उसकी आँखें लाल चमक रही थीं।