मेरे प्यारे भक्तजनों, आज हम बात करने जा रहे हैं उस रात की, उस अमावस्या की... जब अंधकार को मिटाने स्वयं प्रकाश की देवी, माँ महालक्ष्मी, पृथ्वी पर आती हैं। दीपावली केवल दीप जलाने का पर्व नहीं है, यह वह अवसर है जब हम अपने भीतर के प्रकाश को जगाते हैं, अपनी आत्मा को आलोकित करते हैं। कहा गया है कि जिस घर में दीपावली की रात माँ लक्ष्मी का पूजन श्रद्धा और पवित्रता से किया जाता है, वहाँ केवल धन ही नहीं, सुख, शांति और सौभाग्य भी स्थायी रूप से बस जाते हैं। माँ लक्ष्मी उन हृदयों में निवास करती हैं जो स्वच्छ, संतुष्ट और सेवा भाव से भरे हों। इस वर्ष दीपावली कार्तिक अमावस्या को पड़ रही है। शाम का समय छह बजकर दस मिनट से लेकर आठ बजकर चालीस मिनट तक अत्यंत शुभ बताया गया है। यही वह समय है जब ब्रह्मांड की दिव्य शक्तियाँ जागृत होती हैं, जब माँ लक्ष्मी की कृपा सबसे अधिक फलदायी होती है। जो व्यक्ति इस काल में सच्चे भाव से पूजन करता है, उसके जीवन से अभाव और अंधकार सदैव के लिए समाप्त हो जाते हैं।
