विरो का विर एक राजा था उसका जंगलो और पहाड़ो मे मन भाता था वो एक राजा महाराणा कहलाता था मर मिटा था जंगल पहाड़ और अपनी जन्म भुमी बचाने को वो एक राजा महाराणा कहलाता था आया एक और अतिक्रमणकारी कलियुग का सब कुछ लुट कर ले जाने को विरों की जन्म भुमी पर वो आएंगे माटी का सिना चिर जाने को वो विर माटी का लाल नम आंखों से देख, सेहता होगा विरो का विर मेरा एक राजा था उसको जंगल, पहाड प्राणों से भी प्यारा था हम भी जन्मभुमी मर मिट जाएंगे अपनी माटी का कर्ज चुकाएंगे विरो के विर महाराणा बन जाएंगे तुम्हारे आगे मस्तक नही झुकाएंगे
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