जब दो लोग साथ चले होते हैं, उन्होंने हँसते, सपने देखते, भविष्य बनाते, और उस भविष्य की उम्मीदों में जीते थे। लेकिन ज़िंदगी कई बार हमें ऐसी मोड़ पर ले आती है, जहाँ साथ चलना मुश्किल हो जाता है। आज हम बता रहे हैं कि — हमने यह फैसला किया है कि अब हम अलग राहों पर चलेंगे। 👉 लेकिन इससे हमारी ज़िंदगी ख़त्म नहीं होती। 👉 इससे हमारी पहचान नहीं बदलती। हमने साथ बहुत कुछ पाया — प्यार, अनुभव, समझ, दोस्ती। उन पलों को हम भूलेंगे नहीं। लेकिन अब हमें अलग होकर खुद को फिर से खोजने की ज़रूरत है। हमारी आप से सिर्फ इतनी गुज़ारिश है — हमें समझिए, हमें स्वीकारिए, बिना पूर्वाग्रह के। क्योंकि हम किसी की नज़र में ‘उत्तरदायी’ बने रहना चाहते हैं — लेकिन उसी नज़र से जो समझती हो कि कभी-कभी प्यार, साथ, या रिश्ता — सिर्फ साथ चलने के लिए नहीं, बल्कि दोनों को बेहतर इंसान बनने के लिए होता है। अगर आप भी किसी रिश्ते, किसी मोड़, किसी बदलाव से गुज़र रहे हैं — तो याद रखिए: रिश्ते का ख़त्म होना, जीवन का अंत नहीं है। हाँ — ये एक शुरुआत हो सकती है, नई ज़िंदगी की, नई पहचान की, नई उम्मीदों की। अपने आप को दोष मत दीजिए, खुद को कम मत आँकिए। अगर आपने कभी ख़ुद से प्यार करना सीखा — आप फिर से आगे बढ़ पाएँगे। हमारा सन्देश है — दर्द है, लेकिन आप अकेले नहीं है। बदलाव है, लेकिन यह आपको मजबूत बनाएगा। और ज़िंदगी… फिर से, नए तरीके से, आपसे मुस्कुराएगी।
